New Delhi: योग में कई ऐसी मुद्राएं बताई गई हैं जो शरीर और मन को संतुलित रखने में सहायक मानी जाती हैं। इन्हीं में से एक है शून्य मुद्रा। यह एक बेहद सरल योग मुद्रा है, जिसे किसी भी समय और किसी भी स्थान पर बैठकर किया जा सकता है। नियमित अभ्यास से यह मानसिक शांति और शारीरिक संतुलन बनाए रखने में मददगार मानी जाती है।

शून्य मुद्रा करने के लिए सबसे पहले किसी आरामदायक आसन, जैसे सुखासन या पद्मासन में बैठ जाएं। दोनों हाथों को घुटनों पर रखें और हथेलियों को ऊपर की ओर रखें। इसके बाद मध्यमा उंगली को मोड़कर उसके ऊपरी भाग को अंगूठे से हल्के दबाव के साथ स्पर्श करें। बाकी तीनों उंगलियां सीधी रखें। इस दौरान सांसों को सामान्य रखें और मन को शांत रखने का प्रयास करें। कुछ मिनट तक इस स्थिति में रहने के बाद धीरे-धीरे हाथों को सामान्य अवस्था में ले आएं।

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योग विशेषज्ञों के अनुसार शून्य मुद्रा का संबंध शरीर में ऊर्जा संतुलन से माना जाता है। पारंपरिक योग मान्यताओं के अनुसार यह मुद्रा कानों से जुड़ी कुछ सामान्य समस्याओं में राहत पहुंचाने में सहायक हो सकती है। कई लोग इसे कानों में आवाज आने या सुनने से संबंधित हल्की परेशानियों में लाभकारी मानते हैं, हालांकि गंभीर समस्या होने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

यह मुद्रा गले के स्वास्थ्य के लिए भी उपयोगी मानी जाती है। जिन लोगों का पेशा बोलने, पढ़ाने, गायन या मंच संचालन से जुड़ा होता है, उनके लिए इसका अभ्यास लाभदायक बताया जाता है। माना जाता है कि इससे गले की मांसपेशियों को आराम मिलता है और आवाज की स्पष्टता बनाए रखने में सहायता मिल सकती है।

शून्य मुद्रा का प्रभाव मानसिक स्वास्थ्य पर भी देखा जाता है। वर्तमान समय में तनाव, चिंता और मानसिक दबाव आम समस्याएं बन चुकी हैं। ऐसे में कुछ मिनट शांत वातावरण में बैठकर इस मुद्रा का अभ्यास करने से मन को स्थिरता मिल सकती है। इससे व्यक्ति का ध्यान बाहरी उलझनों से हटकर भीतर की ओर केंद्रित होता है, जिससे मानसिक शांति का अनुभव हो सकता है।

योग प्रशिक्षकों का मानना है कि नियमित अभ्यास शरीर में रक्त संचार को बेहतर बनाने में भी सहायक हो सकता है। जब व्यक्ति शांत मन से बैठकर नियंत्रित ढंग से सांस लेता है तो शरीर को आराम मिलता है और संपूर्ण स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

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इसके अलावा शून्य मुद्रा को श्वसन स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना जाता है। अभ्यास के दौरान सांसों पर ध्यान केंद्रित करने से श्वास लेने की प्रक्रिया अधिक सहज हो सकती है। नियमित योग अभ्यास फेफड़ों की कार्यक्षमता और शरीर में ऑक्सीजन की उपलब्धता को बेहतर बनाने में सहायक माना जाता है।

हालांकि शून्य मुद्रा को लेकर बताए जाने वाले कई लाभ पारंपरिक योग मान्यताओं और अनुभवों पर आधारित हैं। किसी भी गंभीर स्वास्थ्य समस्या के उपचार के लिए इसे चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। बेहतर परिणामों के लिए योग विशेषज्ञ के मार्गदर्शन में नियमित अभ्यास करना लाभकारी हो सकता है।

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