Tehran, Iran: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच सामने आई सैटेलाइट तस्वीरों ने दोनों देशों के बीच हुए हमलों के असर को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। उपलब्ध इमेजरी में कई सैन्य ठिकानों पर क्षति के संकेत दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, तस्वीरों के आधार पर सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी पूरी तरह नहीं हो सकी है।
Read more: ईरान पर अमेरिकी एयरस्ट्राइक: 90 सैन्य ठिकानों पर हमला, 3 लोगों की मौ’त
रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में मौजूद कई अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है। इनमें जॉर्डन के प्रिंस हसन एयर बेस पर स्थित एमक्यू-4सी ट्राइटन ड्रोन हैंगर, कतर के अल-उदैद एयर बेस का एक हैंगर और बहरीन स्थित अमेरिकी पांचवें बेड़े के मुख्यालय के पास एक स्टोरेज सुविधा को नुकसान पहुंचने की बात कही गई है। इसके अलावा, कुवैत के एक पुराने संयुक्त राष्ट्र परिसर में भी आग लगने की सूचना सामने आई है, जिसे लेकर ईरान ने दावा किया कि उसका इस्तेमाल अमेरिकी सैन्य गतिविधियों के लिए किया जा रहा था। सामने आई सैटेलाइट तस्वीरों में कुछ सैन्य संरचनाओं, हैंगरों और उपकरणों को क्षति पहुंचने के संकेत दिखाई देते हैं। हालांकि, इन सभी स्थानों पर हुए नुकसान की आधिकारिक और स्वतंत्र पुष्टि अलग-अलग स्रोतों से अभी जारी है।
जवाबी कार्रवाई में अमेरिका ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हमले किए। रिपोर्टों के मुताबिक, सैटेलाइट इमेजरी में बूशहर न्यूक्लियर पावर प्लांट परिसर के भीतर निर्माणाधीन क्षेत्र की एक इमारत नष्ट होती दिखाई दे रही है। यह हिस्सा मुख्य परिचालन रिएक्टर से कुछ दूरी पर स्थित अतिरिक्त रिएक्टर परियोजना का हिस्सा बताया गया है। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी पहले भी चेतावनी दे चुके हैं कि बूशहर परमाणु संयंत्र पर किसी भी प्रकार का सीधा हमला गंभीर रेडियोलॉजिकल जोखिम पैदा कर सकता है, जिसका असर आसपास के क्षेत्रों और खाड़ी के अन्य देशों तक पहुंच सकता है।
Read more: अंकारा में बोले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप; ईरान के साथ हुआ समझौता अब खत्म
रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी हमलों में ईरान के तटीय सैन्य ठिकानों, मिसाइल लॉन्च साइटों, ड्रोन सुविधाओं और कमांड सेंटरों को भी निशाना बनाया गया। अमेरिका का कहना है कि उसकी कार्रवाई सैन्य लक्ष्यों तक सीमित थी, जबकि ईरान का दावा है कि कुछ नागरिक ढांचे और मछली पकड़ने वाले घाट भी प्रभावित हुए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि उपलब्ध सैटेलाइट तस्वीरें दोनों पक्षों के कुछ दावों का आंशिक समर्थन करती हैं, लेकिन पूरे घटनाक्रम का स्पष्ट आकलन करने के लिए विस्तृत जांच और स्वतंत्र सत्यापन अभी आवश्यक है।




