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ढोल-नगाड़ों की गूंज और मांदर की थाप पर झूमा बोकारो, प्रकृति पर्व सरहुल में उमड़ा जनसैलाब

Bokaro: बोकारो जिले में प्रकृति और मानव के अटूट रिश्ते का पर्व सरहुल इस बार पूरे उल्लास और परंपरा के साथ मनाया गया। मौसम में बादल और बारिश के आसार के बावजूद ढोल-नगाड़ों की गूंज, मांदर की थाप और लोगों का उत्साह पूरे शहर में

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Bokaro: बोकारो जिले में प्रकृति और मानव के अटूट रिश्ते का पर्व सरहुल इस बार पूरे उल्लास और परंपरा के साथ मनाया गया। मौसम में बादल और बारिश के आसार के बावजूद ढोल-नगाड़ों की गूंज, मांदर की थाप और लोगों का उत्साह पूरे शहर में देखने लायक रहा।

शनिवार को जिले के विभिन्न सरना स्थलों से भव्य शोभायात्राएं निकाली गईं, जिनमें हजारों लोग शामिल हुए। बच्चे, बुजुर्ग और युवा सभी पारंपरिक वेशभूषा में नजर आए। महिलाएं लाल-पाड़ की सफेद साड़ी में सजी थीं, जबकि पुरुष धोती और पगड़ी में दिखे, जिससे पूरा माहौल पारंपरिक रंग में रंग गया।

शोभायात्रा के दौरान आदिवासी महिला और पुरुष ढोल-नगाड़ा, मांदर और अन्य पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन पर थिरकते नजर आए। सेक्टर-12 स्थित सरना स्थल से निकली यात्रा दूंदीबाग बाजार, 12 मोड़ होते हुए नया मोड़ स्थित बिरसा चौक पहुंची। वहीं सेक्टर-8 से निकली शोभायात्रा सेक्टर-9 ए रोड, बसंती मोड़ और सेक्टर-4 सिटी सेंटर होते हुए भगवान बिरसा मुंडा चौक पहुंची।

इसके अलावा जयपाल नगर, बिरसा नगर, गुमला कॉलोनी, कार्तिक नगर, विकास नगर, गाड़ा बासा, बसंती मोड़ और लेवाटांड़ समेत कई सरना स्थलों से निकली यात्राएं बिरसा चौक पहुंचकर एक-दूसरे से मिलीं और सरहुल की शुभकामनाएं दीं।

इससे पहले शुक्रवार देर रात सेक्टर-8 ए और सेक्टर-12 के सरना स्थलों पर पहानों द्वारा मिट्टी के घड़े में जल स्थापित कर पूजा की शुरुआत की गई थी। शनिवार को इसी जल के आधार पर पहानों ने इस वर्ष सामान्य बारिश और अच्छी फसल होने की संभावना जताई।

पूजा के दौरान पूर्वजों, ग्राम देवी-देवताओं, धर्मेश बाबा और चाला आयो को सखुआ फूल, अरवा चावल और मुर्गा अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना की गई। इसके बाद श्रद्धालुओं के बीच सरहुल फूल और प्रसाद वितरित किया गया।

पूरे आयोजन में ‘का फूल फुईल गेला गेल रे…’ जैसे पारंपरिक गीतों की गूंज सुनाई देती रही। मांदर और नगाड़े की थाप पर युवाओं का नृत्य लोगों के आकर्षण का केंद्र बना रहा।

बालीडीह क्षेत्र में भी सरहुल पर्व पूरे उत्साह के साथ मनाया गया। सेक्टर-8 सरहुल पूजा कमेटी के अध्यक्ष जय मंगल उरांव ने सभी को पर्व की शुभकामनाएं दीं। वहीं उपाध्यक्ष पवन कुमार उरांव ने बताया कि सखुआ वृक्ष प्रकृति संतुलन का प्रतीक है और जल स्तर को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है।

सेक्टर-12 सरना विकास समिति के संजू सामंता ने कहा कि सरहुल मनुष्य और प्रकृति के प्रेम का प्रतीक है और इसे संजोकर रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में कई लोगों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

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