New Delhi: रूस, ईरान और उत्तर कोरिया से जुड़ी क्रिप्टो गतिविधियों को लेकर एक नई रिपोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज कर दी है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इन देशों ने पारंपरिक बैंकिंग व्यवस्था से अलग क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से एक वैकल्पिक भुगतान नेटवर्क विकसित किया है। इसमें वर्ष 2025 के दौरान करीब 9.92 लाख करोड़ रुपये के लेनदेन का उल्लेख किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में कई गुना अधिक बताया गया है।

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रिपोर्ट के अनुसार, इन देशों में क्रिप्टोकरेंसी का उपयोग केवल निवेश या बचत तक सीमित नहीं है। दावा किया गया है कि इसका इस्तेमाल तेल व्यापार, अंतरराष्ट्रीय भुगतान और विभिन्न औद्योगिक व तकनीकी लेनदेन में भी किया जा रहा है। हालांकि, रिपोर्ट में किए गए इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

रिपोर्ट में रूस और ईरान को लेकर क्या दावा किया गया?

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, रूस ने रूबल से जुड़ा A7A5 (ए75) टोकन विकसित किया है। दावा है कि इसके जरिए रूस के भीतर रूबल जमा कर विदेशों में क्रिप्टो आधारित भुगतान किए जा सकते हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मई तक इस प्लेटफॉर्म पर लाखों करोड़ रुपये के बराबर लेनदेन दर्ज किए गए।

वहीं, ईरान को लेकर दावा किया गया है कि वहां कुछ घरेलू क्रिप्टो एक्सचेंज विदेशी भुगतान और तेल कारोबार के वैकल्पिक माध्यम के रूप में इस्तेमाल किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक प्रतिबंधों के बीच क्रिप्टोकरेंसी इन देशों के लिए एक समानांतर वित्तीय विकल्प के रूप में उभर रही है।

उत्तर कोरिया और मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क पर भी रिपोर्ट में दावे

रिपोर्ट में उत्तर कोरिया से जुड़े हैकर समूहों पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। दावा किया गया है कि वर्ष 2025 में कई बड़े साइबर हमलों के जरिए क्रिप्टो संपत्तियां चुराई गईं। इनमें फरवरी में एक प्रमुख क्रिप्टो प्लेटफॉर्म पर हुए बड़े साइबर हमले का भी उल्लेख किया गया है। अमेरिकी जांच एजेंसियां पहले भी उत्तर कोरिया से जुड़े कुछ हैकर समूहों पर ऐसे आरोप लगा चुकी हैं।

रिपोर्ट में चीन से जुड़े कुछ कथित मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का भी जिक्र है। दावा किया गया है कि ये नेटवर्क फर्जी पहचान, एआई आधारित दस्तावेज और अन्य तकनीकों का उपयोग कर विभिन्न देशों की कंपनियों तक पहुंच बना रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है और संबंधित देशों की ओर से इन दावों पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं रही हैं।

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विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर क्रिप्टोकरेंसी का बढ़ता उपयोग नियामक एजेंसियों के लिए नई चुनौती बनता जा रहा है। ऐसे मामलों में पारदर्शिता, निगरानी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की भूमिका पहले से अधिक महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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