Patna: बिहार में पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन को एक साथ रफ्तार देने के लिए राज्य सरकार ने रोहतास जिले में इको टूरिज्म के विकास पर खास ध्यान केंद्रित किया है। प्राकृतिक खूबसूरती, सघन वन क्षेत्र, कैमूर की पहाड़ियों, मनमोहक झरनों, नदियों और ऐतिहासिक विरासतों से भरा रोहतास अब देश-दुनिया के पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण केंद्र बनने जा रहा है।
रोहतास की पहचान सिर्फ ऐतिहासिक किलों तक सीमित नहीं है। कैमूर पर्वत श्रृंखला और उसके आसपास फैले हरे-भरे जंगल इसे प्रकृति आधारित पर्यटन के लिए बेहद खास बनाते हैं। खासकर मानसून और उसके बाद के महीनों में यहां के झरने और हरियाली देखते ही बनती है। नेचर लवर्स, फोटोग्राफी, बर्ड वॉचिंग, ट्रेकिंग और एडवेंचर के शौकीन पर्यटकों के लिए यहां असीम संभावनाएं मौजूद हैं।
जिले के प्रमुख आकर्षणों में मांझर कुंड और तुतला भवानी जलप्रपात सबसे आगे हैं। बारिश के मौसम में इन झरनों का प्राकृतिक सौंदर्य सैलानियों को मंत्रमुग्ध कर देता है। प्रशासन का उद्देश्य इन प्राकृतिक स्थलों को पर्यावरण के संतुलन को बनाए रखते हुए विकसित करना है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर खड़े किए जा सकें। इसके अलावा रोहतासगढ़ किला क्षेत्र इतिहास और प्रकृति का एक शानदार संगम पेश करता है, जहां हेरिटेज और इको टूरिज्म को एक साथ बढ़ावा दिया जा सकता है।
सरकार की योजना स्थानीय समुदाय की भागीदारी से इस मॉडल को आगे बढ़ाने की है। केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ाना ही मकसद नहीं है, बल्कि स्थानीय युवाओं को नेचर गाइड, टूर गाइड, होम-स्टे, लोकल ट्रांसपोर्ट, हस्तशिल्प और खान-पान के कारोबार से जोड़कर उनकी आमदनी में इजाफा करना है। पर्यटन स्थलों पर साफ-सफाई, वेस्ट मैनेजमेंट, सुरक्षित रास्ते, साइनेज, सिटिंग अरेंजमेंट, शुद्ध पेयजल, टॉयलेट, पार्किंग और पुख्ता सुरक्षा जैसी बेसिक सुविधाएं तैयार की जाएंगी।
रोहतास में नेचर टूरिज्म, एडवेंचर टूरिज्म, हेरिटेज टूरिज्म और रूरल टूरिज्म को एक समेकित सर्किट के रूप में जोड़ा जाएगा। इससे पर्यटक यहां अधिक समय तक ठहरेंगे, जिसका सीधा फायदा स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा। नेचर ट्रेल, व्यू प्वाइंट, इंटरप्रिटेशन सेंटर और इको-फ्रेंडली कैंपिंग के जरिए रोहतास बिहार के पर्यटन मानचित्र पर एक नया मुकाम हासिल करने के लिए पूरी तरह तैयार है।




