लातेहार: झारखंड में उग्रवाद के खिलाफ जारी अभियान के तहत सुरक्षाबलों को एक नई और ऐतिहासिक सफलता हाथ लगी है। लातेहार जिला पुलिस और सुरक्षाबलों की संयुक्त टीम ने प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा (माओवादी) के रीजनल कमेटी सदस्य और कुख्यात माओवादी कमांडर रविंद्र गंझू को सफलतापूर्वक गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार उग्रवादी पर झारखंड सरकार और राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की ओर से संयुक्त रूप से कुल 20 लाख रुपये का भारी-भरकम इनाम घोषित था। पुलिस ने उसके पास से घातक एक के-56 (AK-56) राइफल, एक पिस्टल, एक अन्य राइफल, 239 जिंदा कारतूस और भारी मात्रा में अन्य नक्सली प्रचार सामग्रियां बरामद की हैं। रविंद्र गंझू लातेहार जिले के ही चंदवा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले हेसला बांझीटोला गांव का रहने वाला है।
मंगलवार को लातेहार में आयोजित एक विशेष प्रेस वार्ता के दौरान जिले के पुलिस अधीक्षक (एसपी) कुमार गौरव ने इस बड़ी कामयाबी की विस्तृत जानकारी साझा की। एसपी ने बताया कि पुलिस को एक बेहद सटीक और गुप्त सूचना मिली थी कि लंबे समय से फरार चल रहा रविंद्र गंझू गुप्त रूप से चंदवा स्थित अपने पैतृक घर आया हुआ है। इस इनपुट के आधार पर तत्काल त्वरित कार्रवाई करते हुए कोबरा-209 बटालियन के उप कमांडेंट दीपक कुमार के नेतृत्व में जिला बल और केंद्रीय सुरक्षा बलों की एक संयुक्त टीम गठित की गई। सुरक्षा बलों ने सूझबूझ से काम लेते हुए रविंद्र गंझू के पूरे घर की चारों तरफ से घेराबंदी की और बिना किसी खून-खराबे या नुकसान के उसे रंगे हाथों दबोच लिया।
18 पुलिसकर्मियों की शहादत का है जिम्मेदार, 154 से अधिक मामले दर्ज
एसपी कुमार गौरव ने बताया कि रविंद्र गंझू पिछले 16 वर्षों से प्रतिबंधित माओवादी संगठन में अत्यधिक सक्रिय भूमिका निभा रहा था और वह संगठन के शीर्ष नेतृत्व का एक महत्वपूर्ण स्तंभ माना जाता था। उसके खौफनाक आपराधिक इतिहास का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उस पर अलग-अलग नक्सली हमलों में 18 पुलिसकर्मियों की हत्या करने का सीधा आरोप है। इसके अलावा लातेहार, पलामू, लोहरदगा, गुमला और राजधानी रांची सहित झारखंड के विभिन्न जिलों के थानों में उसके खिलाफ नक्सली हिंसा, हत्या, आईईडी विस्फोट, रंगदारी (लेवी) और सरकारी हथियार लूटने से जुड़े 154 से भी अधिक संगीन मामले दर्ज हैं।
पूछताछ में खुले कई बड़े राज, आत्मसमर्पण की अपील
पुलिस की प्रारंभिक पूछताछ के दौरान गिरफ्तार रविंद्र से संगठन के आंतरिक ढांचे और आगामी योजनाओं को लेकर कई बेहद महत्वपूर्ण और चौंकाने वाली जानकारियां हाथ लगी हैं। इन सुरागों के आधार पर पुलिस संगठन के अन्य सक्रिय सदस्यों और उनकी संदिग्ध गतिविधियों के खिलाफ आगे की कड़ी छापेमारी की कार्रवाई कर रही है। प्रेस वार्ता में एसपी ने क्षेत्र में बचे हुए अन्य उग्रवादियों से हथियार डालकर समाज की मुख्यधारा में लौटने की पुरजोर अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति का लाभ उठाने का यह सबसे सही समय है।
प्रेस वार्ता में मौजूद सीआरपीएफ (CRPF) के डीआईजी पंकज कुमार ने भी कड़ा संदेश देते हुए कहा कि जंगलों और सुदूर इलाकों में बचे हुए नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षाबलों का यह दमनकारी अभियान लगातार जारी रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि उग्रवादियों के पास अभी भी आत्मसमर्पण करने का अंतिम अवसर है, अन्यथा कानून के अनुसार उनके खिलाफ बेहद सख्त और निर्णायक कार्रवाई की जाएगी।
प्रमुख बड़ी नक्सली घटनाएं
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7 नवंबर 2011: राजकीय मध्य विद्यालय में पुलिस दल पर हमला व स्कूल भवन को बम से उड़ाना।
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1 फरवरी 2012: घाघू में आईईडी विस्फोट कर सुरक्षाबलों के वाहन को उड़ाना, 3 जवान शहीद।
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7 जनवरी 2013: कटिया जंगल मुठभेड़, जिसमें 11 सीआरपीएफ जवान शहीद हुए थे।
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22 नवंबर 2019: चंदवा के लुकुइया मोड़ के पास पीसीआर वैन पर घात लगाकर हमला, जिसमें 4 पुलिसकर्मी शहीद हुए थे।




