पुलिस महकमे में हलचल, अधिकारियों को ‘डेडलाइन’ का इशारा
बैठक में रांची एसएसपी राकेश रंजन समेत शहर के तमाम बड़े एसपी (ग्रामीण, सिटी और ट्रैफिक) मौजूद थे। कमरे के भीतर माहौल बेहद गंभीर था। धुर्वा थाना कांड संख्या 01/26 की फाइलें खंगाली गईं और अब तक की गई जांच की एक-एक कड़ी की समीक्षा हुई। एडीजी मनोज कौशिक ने जांच टीम को दो टूक शब्दों में निर्देश दिए कि तकनीक और जमीनी सूचनाओं का जाल ऐसा बुना जाए कि बच्चों तक पहुंचना आसान हो सके। उन्होंने जांच में किसी भी तरह की ढिलाई न बरतने और खोज अभियान को और अधिक आक्रामक बनाने पर जोर दिया।
एनजीओ की मदद से बिछेगा देशभर में जाल
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ब्रजेश मिश्रा और राहुल मेहता जैसे चाइल्ड वेलफेयर एक्टिविस्टों के साथ मिलकर यह रणनीति बनी है कि देश के 20 राज्यों के 439 जिलों में फैले एनजीओ कार्यकर्ताओं को अलर्ट किया जाए। मकसद साफ है—अंश और अंशिका अगर झारखंड की सीमा से बाहर भी ले जाए गए हों, तो उन्हें वहां दबोचा जा सके।
इंतजार में पथराई आंखें
प्रशासन की इन कोशिशों के बीच धुर्वा के उस घर में सन्नाटा और मायूसी पसरी है, जहां से ये बच्चे लापता हुए थे। पुलिस का कहना है कि वे बच्चों की सुरक्षित वापसी के लिए हर मुमकिन दरवाजा खटखटा रहे हैं। एडीजी ने भरोसा दिलाया है कि जांच टीम पूरी ताकत झोंक चुकी है और जल्द ही कोई सकारात्मक खबर सामने आएगी।




