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Ranchi : झारखंड के कारा प्रशासन में एक गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। रांची के बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार, होटवार में तैनात उच्च कक्षपाल राहुल कश्यप को गृह एवं कारा विभाग ने सेवा से बर्खास्त कर दिया है। विभागीय जांच में यह खुलासा हुआ कि राहुल कश्यप पहले से ही एक आपराधिक मामले में अदालत से सजा पा चुका था, लेकिन उसने इस जानकारी को नौकरी प्राप्त करते समय छिपा लिया। इस धोखाधड़ी की पुष्टि होने पर विभाग ने कठोर कार्रवाई करते हुए उसे तुरंत प्रभाव से हटा दिया।
सूत्रों के अनुसार, राहुल कश्यप के खिलाफ वर्ष 2010 में दुष्कर्म सहित गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। लंबे समय तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत ने उसे दस साल की सजा सुनाई थी। इसके बाद वह 22 अप्रैल 2014 से 28 अप्रैल 2014 तक खूंटी उपकारा में सजावार बंदी के रूप में रहा। इसी अवधि के बाद 29 अप्रैल 2014 को उसे स्थानांतरित कर रांची स्थित होटवार जेल भेज दिया गया।
मामला तब उजागर हुआ, जब जेल प्रशासन के पास उसकी पृष्ठभूमि से जुड़े संदेहास्पद दस्तावेज और जानकारी पहुँची। इसके बाद कारा विभाग ने तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया। समिति ने सभी अभिलेखों, न्यायालय के आदेशों और कारावास के रिकॉर्ड की गहन जांच की। रिपोर्ट में साफ लिखा गया कि राहुल कश्यप ने जानबूझकर अपनी सजायाफ्ता होने की जानकारी को छुपाया और गलत तरीके से जेल विभाग में नौकरी हासिल की।
जांच रिपोर्ट के आधार पर गृह एवं कारा विभाग ने उसे दोषी मानते हुए बर्खास्त करने का आदेश जारी किया। आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि अब राहुल को किसी भी प्रकार का वेतन, भत्ता अथवा विभागीय लाभ नहीं दिया जाएगा। विभागीय अधिकारियों ने इसे गंभीर नैतिक एवं प्रशासनिक उल्लंघन करार दिया है।
विभागीय सूत्रों का मानना है कि यह मामला राज्य के जेल प्रशासन की स्क्रीनिंग व्यवस्था पर भी सवाल उठाता है। भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए नियुक्ति प्रक्रिया को और सख्त बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
कारा विभाग ने संकेत दिया कि आवश्यकता पड़ने पर इस मामले में आगे भी कार्रवाई की जा सकती है, ताकि आने वाले समय में कोई भी व्यक्ति अपनी आपराधिक पृष्ठभूमि छिपाकर संवेदनशील विभागों में नौकरी न पा सके।

