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पालकोट में ACB की कार्रवाई, मनरेगा BPO ₹6000 रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार

रांची ACB की टीम ने गुमला जिले के पालकोट प्रखंड में मनरेगा तालाब योजना की जियो टैगिंग के एवज में ₹6,000 रिश्वत लेते बीपीओ हरीश प्रजापति को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।

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Gumla: झारखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान चलाते हुए रांची एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की टीम ने गुमला जिले में एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। गुरुवार, 3 सितंबर 2026 को दोपहर में ACB की टीम ने पालकोट प्रखंड कार्यालय में तैनात मनरेगा के ब्लॉक प्रोग्राम ऑफिसर (BPO) हरीश प्रजापति को ₹6,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। इस गिरफ्तारी के बाद प्रखंड कार्यालय में अधिकारियों और कर्मियों के बीच हड़कंप मच गया है।

तालाब जियो टैगिंग के एवज में मांगी थी घूस

मिली जानकारी के अनुसार, पालकोट के मुस्लिम मोहल्ला निवासी मो. सहाबुद्दीन मियां के नाम से मनरेगा के तहत 100×100 फीट के तालाब निर्माण की योजना स्वीकृत हुई थी। आरोप है कि बीपीओ हरीश प्रजापति ने इस योजना के काम को आगे बढ़ाने और अनिवार्य जियो टैगिंग (Geo-Tagging) करने के बदले लाभार्थी से कुल ₹10,000 की रिश्वत की मांग की थी। रिश्वत नहीं देने पर काम अटकाने की धमकी दी जा रही थी।

ACB का ट्रैप और गिरफ्तारी

लाभार्थी सहाबुद्दीन मियां ने इस संबंध में रांची ACB कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। टीम ने शिकायत का गोपनीय सत्यापन कराने के बाद आरोपी बीपीओ को पकड़ने के लिए जाल बिछाया। तय योजना के मुताबिक, जैसे ही लाभार्थी ने प्रखंड कार्यालय स्थित बीपीओ के कक्ष में उन्हें रिश्वत की पहली किस्त के रूप में ₹6,000 नकद दिए, आसपास तैनात ACB के सदस्यों ने उन्हें रंगे हाथ दबोच लिया।

पूछताछ के लिए रांची ले गई टीम

गिरफ्तारी के बाद ACB की टीम ने जरूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी की और आरोपी बीपीओ हरीश प्रजापति को अपने साथ पूछताछ और आगे की कार्रवाई के लिए रांची ले गई है। बीपीओ के हाथ धुलवाने पर रासायनिक प्रक्रिया में नोटों के रंग की पुष्टि हुई है। ACB सूत्रों के अनुसार, आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जेल भेजा जाएगा। जिले में इस कार्रवाई की काफी चर्चा हो रही है।

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