New Delhi: लोकसभा में बजट पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुए हालिया समझौतों पर गंभीर सवाल उठाए। राहुल गांधी ने सरकार पर आरोप लगाया कि व्यापारिक बातचीत के दौरान भारत ने अपनी ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ (Strategic Autonomy) खो दी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर ‘इंडिया’ अलायंस सत्ता में होता, तो अमेरिका के साथ बराबरी की शर्तों पर बात होती, न कि ‘मालिक और नौकर’ की तरह।

‘डेटा भारतीयों की सबसे बड़ी संपत्ति’

राहुल गांधी ने डिजिटल ट्रेड नियमों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि 21वीं सदी में डेटा ही भारत को सुपरपावर बनाने की ताकत रखता है, लेकिन सरकार ने डेटा लोकलाइजेशन हटाकर और अमेरिका में डेटा के फ्री फ्लो की इजाजत देकर अपना नियंत्रण खो दिया है। उन्होंने कहा, “हम राष्ट्रपति ट्रंप से कहते कि आप अपने डॉलर को बचाना चाहते हैं, तो यह समझ लें कि आपके डॉलर को बचाने के लिए सबसे बड़ी संपत्ति भारतीयों के पास है।”

एनर्जी सिक्योरिटी और पाकिस्तान का जिक्र

राहुल गांधी ने ट्रेड डील को ऊर्जा सुरक्षा के लिए खतरा बताते हुए कहा कि अब अमेरिका तय करेगा कि भारत अपना तेल कहां से खरीदेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भारत किसी ऐसे देश से तेल खरीदता है जो अमेरिका को पसंद नहीं है, तो टैरिफ के जरिए हमें सजा दी जाएगी।

सबसे तीखी टिप्पणी भारत के वैश्विक दर्जे को लेकर रही। राहुल गांधी ने कहा, “भारत को पाकिस्तान के बराबर खड़ा नहीं किया जा सकता। अगर ट्रंप पाकिस्तान के आर्मी चीफ के साथ ब्रेकफास्ट करते हैं, तो भारत को अपनी आवाज बुलंद करनी होगी। हम बराबरी की ताकत के तौर पर बातचीत करेंगे, पाकिस्तान बनकर नहीं।” राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि वर्तमान ट्रेड अरेंजमेंट भारत की एनर्जी खरीदने की स्वायत्तता को सीमित कर रहा है और सरकार ने डिजिटल टैक्स पर कैप लगाकर देश के हितों को नुकसान पहुंचाया है।

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