Lucknow News: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने एक बार फिर अपने सबसे भरोसेमंद सिपहसालार पर दांव खेला है। 1990 बैच के पूर्व आईपीएस अधिकारी और यूपी के पूर्व डीजीपी प्रशांत कुमार को ‘उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग’ (UPESSC) का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। 17 दिसंबर 2025 को जारी आदेश के मुताबिक, प्रशांत कुमार अब अगले तीन साल तक प्रयागराज स्थित इस आयोग की कमान संभालेंगे, जहाँ माध्यमिक और उच्च शिक्षा में शिक्षकों की भर्ती की जिम्मेदारी उनके कंधों पर होगी।
बिहार की मिट्टी और यूपी का कड़ा प्रशासन
मूल रूप से बिहार के सीवान जिले के रहने वाले प्रशांत कुमार का जन्म 16 मई 1965 को हुआ था। 1990 में आईपीएस बनने के बाद उन्हें तमिलनाडु कैडर मिला था, लेकिन 1994 में वे यूपी कैडर में आ गए। इसके बाद से उनका पूरा करियर यूपी पुलिस की सेवा में बीता। वे अपनी कार्यकुशलता और अपराधियों के प्रति सख्त रवैये के कारण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ‘गुड बुक’ में हमेशा टॉप पर रहे। यही वजह है कि इसी साल रिटायर होने के महज सात महीने बाद उन्हें शिक्षा जगत की इतनी बड़ी जिम्मेदारी सौंप दी गई।
300 एनकाउंटर और ‘राष्ट्रपति मेडल’ का गौरव
प्रशांत कुमार की पहचान केवल एक शांत अधिकारी की नहीं, बल्कि एक ‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ की रही है। उनके नेतृत्व में यूपी पुलिस ने अपराधियों के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया और कहा जाता है कि उनके मार्गदर्शन में 300 से ज्यादा एनकाउंटर हुए। उनकी वीरता का लोहा देश ने भी माना, तभी तो उन्हें लगातार चार साल (2020 से 2023) राष्ट्रपति का प्रतिष्ठित ‘पुलिस मेडल फॉर गैलेंट्री’ प्रदान किया गया।
पुलिसिंग के साथ पढ़ाई में भी रहे अव्वल
प्रशांत कुमार का नाम केवल बंदूकों और एनकाउंटर तक सीमित नहीं है, उनका शैक्षणिक बैकग्राउंड बेहद प्रभावशाली है। उनके पास तीन उच्च स्तरीय डिग्रियां हैं—एमएससी (जूलॉजी), एमबीए (डिजास्टर मैनेजमेंट) और एमफिल (डिफेंस एंड स्ट्रैटेजिक स्टडीज)। विज्ञान, प्रबंधन और रक्षा रणनीति की गहरी समझ रखने वाले प्रशांत कुमार से अब उम्मीद की जा रही है कि वे उत्तर प्रदेश के शिक्षा आयोग में पारदर्शिता और तेजी के साथ शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाएंगे।



