रांची: झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने केंद्र सरकार की पेट्रोलियम और ऊर्जा नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। गुरुवार को रांची के हरमू स्थित पार्टी मुख्यालय में एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए झामुमो के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने दो टूक कहा कि केंद्र की गलत नीतियों के कारण आज देश की आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ रही है, लेकिन सरकार इस गंभीर मुद्दे पर संवेदनहीन बनी हुई है।
बहुआयामी संकट का अंदेशा
भट्टाचार्य ने पेट्रोलियम पदार्थों की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि ईंधन का मतलब सिर्फ गाड़ी चलाना नहीं है। उन्होंने समझाया कि पेट्रोलियम उत्पाद सीधे तौर पर उद्योगों, कृषि (उर्वरक उत्पादन) और बुनियादी ढांचे (कोलतार/सड़क निर्माण) से जुड़े हैं। कीमतों में एक पैसे की भी बढ़ोतरी का असर थाली से लेकर फैक्ट्रियों तक पड़ता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियां केवल आंकड़ों का खेल हैं, जिनका धरातल पर आम लोगों के लिए कोई लाभ नहीं दिख रहा।
रसोई से लेकर उद्योगों तक हाहाकार
एलपीजी की बढ़ती कीमतों पर चिंता जताते हुए भट्टाचार्य ने कहा कि आज मध्यम और गरीब परिवार के लिए सिलेंडर भरवाना किसी चुनौती से कम नहीं है। उन्होंने पुराने समय की याद दिलाते हुए कहा, “एक दौर था जब लोग सुलभ कोयले पर खाना बना लेते थे, लेकिन आज केंद्र की नीतियों ने कोयले को भी आम जनता से दूर कर दिया है।” उन्होंने आरोप लगाया कि देश के कीमती कोयला संसाधनों का नियंत्रण अब बड़े कॉरपोरेट घरानों के हाथों में सौंपा जा रहा है, जिससे भविष्य में ऊर्जा का संकट और गहरा सकता है।
झारखंड के हाथों में कुछ नहीं
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकारों और संसाधनों के वितरण पर ‘दोहरे मापदंड’ का जिक्र करते हुए उन्होंने झारखंड की विवशता भी जाहिर की। उन्होंने स्पष्ट किया कि झारखंड जैसे संसाधन संपन्न राज्य के पास भी पेट्रोलियम या कोयले के मूल्य निर्धारण का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। केंद्र सरकार की एकाधिकार वाली नीतियों के कारण राज्य सरकार चाहकर भी जनता को सीधी राहत देने में सक्षम नहीं है।
प्रमुख माँगें
-
एलपीजी सिलेंडर की कीमतों को तुरंत कम किया जाए।
-
पेट्रोल और डीजल के दामों में की गई वृद्धि को तत्काल वापस लिया जाए।
-
ऊर्जा और संसाधनों के निजीकरण पर लगाम लगाई जाए ताकि आम जनता को राहत मिल सके।



