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Home»#Trending»पैंगोलिन खाल तस्करी का भंडाफोड़: डब्ल्यूएलसीबी ने दो तस्करों को दबोचा, अंतरराज्यीय गिरोह का खुलासा
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पैंगोलिन खाल तस्करी का भंडाफोड़: डब्ल्यूएलसीबी ने दो तस्करों को दबोचा, अंतरराज्यीय गिरोह का खुलासा

By Shiwam KeshriDecember 22, 20254 Mins Read
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गुमला (संवाददाता):-वन्यजीव अपराध के खिलाफ एक बड़ी और अहम कार्रवाई करते हुए वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (WLCB) की टीम ने गुमला जिले में दुर्लभ वन्यजीव पैंगोलिन की खाल की तस्करी का खुलासा किया है। इस कार्रवाई में दो तस्करों को भारी मात्रा में पैंगोलिन की खाल के साथ गिरफ्तार किया गया है। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि यह केवल स्थानीय मामला नहीं, बल्कि एक संगठित अंतरराज्यीय तस्करी गिरोह का हिस्सा है, जिसके तार अन्य राज्यों और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़े हो सकते हैं।

गुप्त सूचना पर हुई सुनियोजित कार्रवाई

डब्ल्यूएलसीबी को गुप्त सूचना मिली थी कि चैनपुर रोड स्थित मरियम टोली इलाके में पैंगोलिन की खाल की अवैध खरीद-बिक्री की तैयारी की जा रही है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए टीम ने इलाके में निगरानी शुरू की और पूरी योजना के साथ छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान दो व्यक्तियों को मौके से पकड़ा गया, जिनके पास से पैंगोलिन की खाल बरामद की गई।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान रमेश्वर राम और मनसूर अंसारी के रूप में हुई है, जो मरियम टोली क्षेत्र के निवासी बताए जा रहे हैं। बरामद खाल का वजन और मात्रा देखकर अधिकारियों को आशंका है कि यह एक से अधिक पैंगोलिन की खाल हो सकती है, जिससे इस अपराध की गंभीरता और बढ़ जाती है।

अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क की आशंका

डब्ल्यूएलसीबी अधिकारियों के अनुसार पैंगोलिन दुनिया के सबसे अधिक तस्करी किए जाने वाले स्तनधारी जीवों में शामिल है। इसकी खाल और शल्क (स्केल्स) की अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी मांग है। प्रारंभिक पूछताछ में यह संकेत मिले हैं कि बरामद खाल को किसी बड़े तस्कर या सौदागर तक पहुंचाने की योजना थी, जहां से इसे आगे देश से बाहर भेजा जाना था।

वन प्रमंडल पदाधिकारी (DFO) अहमद बिलाल अख्तर ने बताया कि पैंगोलिन अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) की रेड लिस्ट में अत्यंत संकटग्रस्त प्रजाति के रूप में सूचीबद्ध है। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत इसके शिकार, परिवहन और व्यापार पर पूरी तरह प्रतिबंध है। इसके बावजूद अवैध तस्करी लगातार बढ़ रही है, जो गंभीर चिंता का विषय है।

छत्तीसगढ़ के जंगलों से खाल लाने का अनुमान

जांच एजेंसियों को संदेह है कि बरामद पैंगोलिन की खाल छत्तीसगढ़ के घने जंगलों से लाई गई है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया है कि वे स्थानीय शिकारी नेटवर्क के संपर्क में थे, जो जंगलों में पैंगोलिन का शिकार कर खाल और शल्क उपलब्ध कराते हैं। इसके बाद यह सामग्री दलालों के जरिए विभिन्न राज्यों में सप्लाई की जाती है।

अधिकारियों का कहना है कि चीन समेत कई देशों में पैंगोलिन की खाल, शल्क और मांस का उपयोग पारंपरिक दवाइयों और अंधविश्वास से जुड़े उपचारों में किया जाता है। इसी कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी मांग बहुत अधिक है और तस्करी एक संगठित अपराध का रूप ले चुकी है।

आरोपियों से गहन पूछताछ, नेटवर्क खंगालने में जुटी एजेंसियां

गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। डब्ल्यूएलसीबी की टीम अब पूरे तस्करी नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में लगी हुई है। यह भी जांच की जा रही है कि इस अवैध कारोबार में और कौन-कौन लोग शामिल हैं, स्थानीय स्तर पर किन लोगों ने सहयोग किया और खाल को आगे कहां भेजा जाना था।

अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई केवल दो लोगों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि एक बड़े नेटवर्क के खुलासे की शुरुआत है। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

वन्यजीव संरक्षण पर फिर उठे सवाल

इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि दुर्लभ और संकटग्रस्त वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर समाज और प्रशासन दोनों को और अधिक सतर्क होने की जरूरत है। विशेषज्ञों के अनुसार पैंगोलिन जैसे जीव पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन लालच और अवैध व्यापार के कारण इनका अस्तित्व खतरे में पड़ गया है।

डब्ल्यूएलसीबी और वन विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि कहीं भी वन्यजीव शिकार या तस्करी से जुड़ी कोई गतिविधि दिखाई दे, तो तुरंत संबंधित विभाग या पुलिस को सूचना दें।

कानूनी प्रावधान और सख्त सजा का प्रावधान

वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत पैंगोलिन के शिकार या तस्करी में दोषी पाए जाने पर लंबी जेल की सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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