West Singhbhum : झारखंड के सारंडा जंगल में नक्सली गतिविधियां एक बार फिर तेज हो गई हैं। सोमवार देर रात भाकपा (माओवादी) नक्सलियों ने छोटानागरा थाना क्षेत्र के बहदा गांव में एयरटेल कंपनी के मोबाइल टावर को आग के हवाले कर दिया। नक्सलियों ने इस घटना के बाद मौके पर कई पोस्टर और पर्चे छोड़े, जिनमें पुलिस को खुली चुनौती दी गई और अपने मारे गए साथियों का बदला लेने की चेतावनी दी गई है।

ग्रामीणों के अनुसार, 13 अक्टूबर की आधी रात करीब 12 हथियारबंद नक्सली गांव में पहुंचे। उन्होंने पहले ग्रामीणों को घरों में रहने की हिदायत दी और किसी को बाहर न निकलने की धमकी दी। इसके बाद नक्सलियों ने मोबाइल टावर के पास रखे बैटरी पैनल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। कुछ ही मिनटों में पूरा टावर आग की लपटों में घिर गया और धमाकों की आवाजें दूर-दूर तक सुनाई देने लगीं। गांव के लोग पूरी रात भयभीत होकर अपने घरों में छिपे रहे।

आगजनी से टावर की बैटरियां, केबल और बिजली लाइनें पूरी तरह जलकर नष्ट हो गईं। परिणामस्वरूप इलाके में मोबाइल नेटवर्क पूरी तरह ठप हो गया है। इससे न सिर्फ संचार व्यवस्था बाधित हुई है, बल्कि ग्रामीणों की ऑनलाइन पढ़ाई, बैंकिंग कार्य और यूपीआई लेन-देन भी प्रभावित हो गए हैं।

घटनास्थल पर मिले नक्सली पोस्टरों में लिखा है कि यह हमला पुलिस के “ऑपरेशन कगार” के विरोध में किया गया है। नक्सलियों ने 8 से 14 अक्टूबर तक ‘प्रतिशोध सप्ताह’ मनाने और 15 अक्टूबर को झारखंड, बिहार, उत्तरी छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और असम में बड़े हमलों की धमकी दी है। पोस्टर में लिखा है, “पुलिस हमारे साथियों का खून बहा रही है, अब बदला उसी अंदाज में लिया जाएगा।”

स्थानीय लोगों ने कहा कि इस तरह की घटनाओं से आम जनता का जीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है। उनका कहना है कि टावर जलाने से नुकसान सरकार या पुलिस को नहीं, बल्कि आम ग्रामीणों को झेलना पड़ रहा है। उन्होंने नक्सलियों से अपील की है कि वे अपनी लड़ाई जनता के खिलाफ न लड़ें।

घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने जले हुए टावर और पोस्टरों को जब्त कर जांच शुरू कर दी है। इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और नक्सलियों की तलाश के लिए सर्च अभियान चलाया जा रहा है। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि जल्द ही टावर की मरम्मत कर मोबाइल नेटवर्क बहाल किया जाएगा।

इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सारंडा जंगल क्षेत्र में नक्सली नेटवर्क अब भी सक्रिय है और सुरक्षा एजेंसियों को बड़ी चुनौती दे रहा है।

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