रांची। राज्य के शैक्षणिक वातावरण को सुदृढ़ एवंं विकसित करने में स्थानीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका सराहनीय है। वर्षों से ये अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान बिना भेद-भाव किए सभी वर्ग को शिक्षित कर रहे हैैं लेकिन यह दुर्भाग्य है कि इन अल्पसंख्यक संस्थानों का अब तक अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र निर्गत नहीं किया जा सका है क्योंकि इस बाबत राज्य सरकार द्वारा कोई नियमावली नहीं बन पाई है। यह बातें 3 अप्रैल 2025 को राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान आयोग, भारत सरकार के कार्यकारी अध्यक्ष प्रो शाहिद अख्तर ने कही। वह प्रोजेक्ट भवन स्थित कैबिनेट सभागार में शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक कर रहे थे। बैठक का आयोजन राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान आयोग भारत सरकार एवं झारखंड राज्य अल्पसंख्यक आयोग के संयुक्त तत्वाधान में किया गया था। नियमावली नहीं बनने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए प्रो अख्तर ने सुझाव देते हुए कहा राज्य सरकार इसके लिए यथाशीघ्र कदम उठाए। बैठक में मुख्य रूप से अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष हिदायतुल्लाह खान, त्रय उपाध्यक्ष शमशेर आलम, ज्योति सिंह मथारू, प्राणेश साॅलोमन, कल्याण विभाग सचिव कृपानंद झा, प्राथमिक शिक्षा निदेशक शशि प्रकाश सिंह, माध्यमिक शिक्षा निदेशक राजेश प्रसाद एवं उच्च शिक्षा निदेशक रामनिवास यादव शामिल हुए।
कैबिनेट स्वीकृति के बाद निर्गत होगा प्रमाण पत्र
प्राथमिक शिक्षा निदेशक शशि प्रकाश सिंह ने जानकारी देते हुए कहा शिक्षा विभाग द्वारा नियमावली संबंधी ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है। कैबिनेट से स्वीकृति के बाद प्रमाण पत्र निर्गत करने की कार्रवाई की जाएगी। इस पर प्रो अख्तर ने कहा केरल, तमिलनाडु, बिहार एवं पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा इस दिशा में कारगर प्रयास किया गया है। शिक्षा विभाग इन राज्यों से संपर्क कर सहयोग ले सकता है। बैठक के बाद सबने मिलकर मुख्य सचिव अल्का तिवारी से मुलाकात की और लिए गए निर्णय से उन्हें अवगत कराया। इस पर मुख्य सचिव ने जल्द कार्रवाई का भरोसा दिलाया।
सहायक आचार्य में 7232 उर्दू शिक्षकों की होगी बहाली
बैठक केे दौरान अल्पसंख्यक आयोग अध्यक्ष हिदायतुल्लाह खान ने उर्दू, बांग्ला एवं उड़िया शिक्षकों की बहाली, नए मदरसों का रजिस्ट्रेशन के संबंध में शिक्षा विभाग के अधिकारियों से जानकारी मांगी। इस पर प्राथमिक शिक्षा निदेशक ने कहा जल्द ही सहायक आचार्य के रूप में 7232 उर्दू शिक्षकों की बहाली की जाएगी। आयोग के उपाध्यक्ष शमशेर आलम ने आलीम एवं फाजिल की डिग्री JAC द्वारा प्रदान किए जाने पर आपत्ति जताते हुए कहा दूसरे राज्यों में JAC द्वारा आलीम एवं फाजिल की डिग्री लेने वालों को मान्यता नहीं दी जाती है। इसके लिए जरूरी है कि यहां भी विश्वविद्यालय स्तर से डिग्री का प्रमाण पत्र निर्गत हेतु व्यवस्था की जाए। इस पर शिक्षा विभाग के पदाधिकारियाें ने उच्च पदाधिकारियों को अवगत कराने का आश्वासन दिया। आयोग के उपाध्यक्ष ज्योति सिंह मथारू एवं प्राणेश साॅलोमन ने भी मामले में शिक्षा विभाग के अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।