New Delhi: क्या आप जानते हैं कि दुनिया में एक ऐसी जगह भी है जहां इतनी बारिश होती है कि उसका नाम ‘गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ में दर्ज है? हम बात कर रहे हैं भारत के मेघालय राज्य के ईस्ट खासी हिल्स जिले में स्थित एक छोटे से गांव मावसिनराम की। यहां औसतन सालाना लगभग 11,872 मिलीमीटर वर्षा होती है। अगर इसकी तुलना दिल्ली या मुंबई जैसे बड़े शहरों से की जाए, जहां साल भर में औसतन 700 से 1000 मिमी बारिश होती है, तो मावसिनराम में सामान्य शहरों के मुकाबले 10 से 15 गुना अधिक पानी बरसता है।

इतनी अत्यधिक वर्षा के कारण यह पूरा इलाका हमेशा मखमली हरी चादर, दूधिया झरनों और घने जंगलों से ढका रहता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस भारी बारिश का मुख्य कारण मावसिनराम की खास भौगोलिक बनावट है। यह गांव खासी पहाड़ियों की दक्षिणी ढलानों पर स्थित है, जो बंगाल की खाड़ी से आने वाली दक्षिण-पश्चिम मानसूनी हवाओं के सीधे रास्ते में पड़ता है। जब ये नमी से लदी हवाएं अचानक ऊंचे पहाड़ों से टकराती हैं, तो वे ऊपर उठकर ठंडी हो जाती हैं और भारी बारिश करती हैं। विज्ञान की भाषा में इस प्रक्रिया को ‘ओरोग्राफिक रेनफॉल’ कहा जाता है।

कैसे मापी जाती है इतनी बारिश?

मौसम विभाग (IMD) बारिश को मापने के लिए ‘रेन गेज’ नामक उपकरण का उपयोग करता है। वर्षा को आमतौर पर मिलीमीटर (मिमी) में मापा जाता है। उदाहरण के लिए, 1 मिमी बारिश का मतलब है कि अगर पानी जमीन से बहे या सूखे नहीं, तो जमीन पर 1 मिमी मोटी परत जमा हो जाएगी। इस आधार पर, मावसिनराम की वार्षिक वर्षा का अर्थ है कि वहां सैद्धांतिक रूप से हर साल लगभग 11.8 मीटर ऊंचा पानी जमा हो सकता है, जो किसी तीन मंजिला इमारत के बराबर है।

चुनौतियां और प्राकृतिक वैभव

अत्यधिक वर्षा ने इस क्षेत्र को प्राकृतिक रूप से बेहद समृद्ध बनाया है, लेकिन इसके साथ कई मुश्किलें भी जुड़ी हैं। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते यहां अक्सर भूस्खलन (लैंडस्लाइड) और मिट्टी के कटाव जैसी समस्याएं पैदा होती हैं। परिवहन और बुनियादी ढांचे को बनाए रखना यहां के लोगों के लिए एक बड़ी चुनौती है। इसके बावजूद, बादलों के बीच बसे इस गांव की खूबसूरती हर साल हजारों पर्यटकों को अपनी ओर खींचती है, जो इस ‘जल-प्रलय’ जैसे नजारे को करीब से देखना चाहते हैं।

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