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मणिपुर में खत्म होगा राष्ट्रपति शासन? दिल्ली में विधायकों का जमावड़ा!

New Delhi: पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में पिछले एक साल से लगा सियासी ‘लॉकडाउन’ अब हटने की कगार पर है। राज्य में लागू राष्ट्रपति शासन की समय सीमा 12 फरवरी को समाप्त हो रही है, जिसे देखते हुए भाजपा आलाकमान ने मिशन मोड में काम शुरू

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New Delhi: पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में पिछले एक साल से लगा सियासी ‘लॉकडाउन’ अब हटने की कगार पर है। राज्य में लागू राष्ट्रपति शासन की समय सीमा 12 फरवरी को समाप्त हो रही है, जिसे देखते हुए भाजपा आलाकमान ने मिशन मोड में काम शुरू कर दिया है। दिल्ली से आए एक अचानक संदेश के बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष शारदा देवी के नेतृत्व में 20 से अधिक विधायकों और एनपीपी-एनपीएफ जैसे गठबंधन सहयोगियों का दल राष्ट्रीय राजधानी पहुंच चुका है। इंफाल एयरपोर्ट पर विधायकों की गहमागहमी इस बात का स्पष्ट संकेत है कि मणिपुर में लोकतांत्रिक सरकार की वापसी का काउंटडाउन शुरू हो चुका है।

नेतृत्व पर सस्पेंस बरकरार: क्या बीरेन सिंह की होगी वापसी?

राज्य की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यही है कि नई सरकार का चेहरा कौन होगा? पूर्व मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने दिल्ली रवानगी से पहले सकारात्मक संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि राजग (NDA) के सभी सहयोगियों को बुलाया जाना एक सुखद परिणाम की ओर इशारा है। हालांकि, लामसांग विधायक एस राजन सिंह का कहना है कि अंतिम फैसला केंद्रीय नेतृत्व ही करेगा। सवाल यह है कि क्या भाजपा पुराने चेहरे पर भरोसा जताएगी या हिंसा के बाद उपजे हालातों को देखते हुए किसी नए नेतृत्व को मौका दिया जाएगा।

गठबंधन सहयोगियों का रुख और सुरक्षा चुनौतियां

भाजपा के पास 60 सदस्यीय विधानसभा में 37 विधायकों का मजबूत आंकड़ा है, लेकिन एनपीपी (6) और एनपीएफ (5) का समर्थन सरकार को और मजबूती देता है। एनपीपी के प्रदेश अध्यक्ष लोरहो एस पफोजे ने स्पष्ट किया है कि वे ‘गठबंधन धर्म’ निभाने को तैयार हैं। लेकिन सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती जातीय हिंसा के घावों को भरना है। मई 2023 से शुरू हुई मेइती और कुकी समुदायों के बीच की तकरार में 260 से ज्यादा जानें जा चुकी हैं।

12 फरवरी का दिन क्यों है खास?

पिछले साल 13 फरवरी को अशांति के बीच एन बीरेन सिंह ने इस्तीफा दिया था, जिसके बाद केंद्र ने बागडोर अपने हाथ में ले ली थी। अब एक साल बाद उसी तारीख से ठीक पहले दिल्ली में होने वाली यह बैठक मणिपुर के भविष्य की नई इबारत लिख सकती है। सोमवार शाम को होने वाली हाई-लेवल मीटिंग के बाद साफ हो जाएगा कि पहाड़ी और घाटी के बीच के तनाव को कम करने के लिए भाजपा का ‘फ्यूचर प्लान’ क्या है।

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