Imphal: मणिपुर के सेनापति शहर में असम राइफल्स के कैंप पर उग्र भीड़ ने हमला कर दिया। अधिकारियों के अनुसार, घटना के दौरान पथराव, आगजनी और तोड़फोड़ की गई। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि यह हमला सशस्त्र उग्रवादियों के खिलाफ चल रहे अभियान को बाधित करने के उद्देश्य से किया गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सेनापति पुलिस और सीआरपीएफ के जवानों को तैनात किया गया।

खबर में उल्लेखित पृष्ठभूमि के अनुसार, 6 जुलाई को उखरूल जिले में घात लगाकर किए गए हमले में असम राइफल्स के दो जवान शहीद हुए थे। इस मामले में तीन संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है। साथ ही एनएससीएन-आईएम ने घटना में अपनी संलिप्तता से इनकार करते हुए युद्धविराम समझौते और भारत-नागा शांति प्रक्रिया के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।

हमले के दौरान असम राइफल्स के कई वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया। एक वाहन में आग लगा दी गई, जबकि दो ट्रकों को पलट दिया गया। घटना में एक आम नागरिक की कार भी आग के हवाले कर दी गई।

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खुफिया सूचना के बाद शुरू हुआ अभियान

रक्षा प्रवक्ता के अनुसार, मकुइलोंगडी क्षेत्र में सशस्त्र कैडरों की मौजूदगी की विश्वसनीय खुफिया सूचना मिलने के बाद असम राइफल्स ने क्षेत्र प्रभुत्व गश्त और तलाशी अभियान शुरू किया। यह इलाका ओकलोंग स्थित नामित एनएससीएन कैंप से करीब दो किलोमीटर पश्चिम में है।

प्रवक्ता ने बताया कि खुफिया रिपोर्टों और सोशल मीडिया पोस्टों से संकेत मिले थे कि कुछ सशस्त्र कैडर निर्धारित कैंपों से बाहर हथियारों और वर्दी के साथ घूम रहे थे, जो युद्धविराम के स्थापित नियमों का उल्लंघन है। इस संबंध में सीजफायर मॉनिटरिंग ग्रुप को भी औपचारिक रूप से जानकारी दी गई थी।

अभियान के दौरान भीड़ ने रोका रास्ता

असम राइफल्स की टुकड़ियां जब मकुइलोंगडी और ओकलोंग गांवों की ओर बढ़ रही थीं, तब बड़ी संख्या में लोगों ने उनका रास्ता रोक लिया। भीड़ में महिलाएं भी शामिल थीं।

रक्षा प्रवक्ता के मुताबिक जवानों ने संयम बरतते हुए स्थानीय प्रतिनिधियों से बातचीत की और स्पष्ट किया कि अभियान का उद्देश्य केवल सुरक्षा सुनिश्चित करना और क्षेत्र में शांति बनाए रखना है। साथ ही यह आश्वासन भी दिया गया कि संबंधित अधिकारियों की अनुमति के बिना किसी गांव में प्रवेश नहीं किया जाएगा।

लौटने के बाद कैंप पर हमला

असम राइफल्स की टुकड़ियों के वापस लौटने के बावजूद रात में बड़ी संख्या में लोग कैंप तक पहुंच गए। भीड़ ने पथराव किया, संपत्ति को नुकसान पहुंचाया और आगजनी की कोशिश की। लौटते समय भीड़ ने सुरक्षा बलों के वाहनों में भी तोड़फोड़ की। एक वाहन को आग लगा दी गई, जबकि दो ट्रकों को पलटकर क्षतिग्रस्त कर दिया गया।

सुरक्षा बलों, मणिपुर पुलिस और सीआरपीएफ के संयुक्त प्रयासों से स्थिति पर काबू पा लिया गया। अधिकारियों के अनुसार मंगलवार और बुधवार की मध्यरात्रि तक पूरी भीड़ को तितर-बितर कर दिया गया था।

उखरूल हमले में तीन संदिग्ध हिरासत में

इस बीच एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि 6 जुलाई को मणिपुर के उखरूल जिले में हुए घात लगाकर किए गए हमले, जिसमें असम राइफल्स के दो जवान शहीद हुए थे, उस मामले में तीन संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है।

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वहीं, नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालिम-इसाक-मुइवा (एनएससीएन-आईएम) ने इस हमले में अपनी किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया है। संगठन ने कहा है कि वह केंद्र सरकार के साथ हुए युद्धविराम समझौते और जारी भारत-नागा शांति प्रक्रिया के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

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