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सेविकाओं ने लगाया ‘खानापूर्ति’ और ‘जबरन दस्तखत’ का आरोप

चैनपुर/गुमला-चैनपुर प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्रों में चल रहे बिजली वायरिंग के कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आंगनबाड़ी सेविकाओं ने इस कार्य को “खानापूर्ति” करार दिया है और आरोप लगाया है कि खराब गुणवत्ता के चलते केंद्रों में पढ़

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चैनपुर/गुमला-चैनपुर प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्रों में चल रहे बिजली वायरिंग के कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आंगनबाड़ी सेविकाओं ने इस कार्य को “खानापूर्ति” करार दिया है और आरोप लगाया है कि खराब गुणवत्ता के चलते केंद्रों में पढ़ रहे छोटे बच्चों के लिए बड़ा खतरा पैदा हो सकता है।

तारों का दानिय हाल, सरकारी राशि का बंदरबांट का अंदेशा

प्राप्त जानकारी के अनुसार, केंद्रों में प्रति केंद्र एक पंखा और एक बल्ब का कनेक्शन किया जा रहा है, लेकिन वायरिंग का कंडीशन अत्यंत दयनीय है। इसे देखकर स्पष्ट होता है कि सरकारी राशि का बड़े पैमाने पर बंदरबांट किया जा रहा है।
नाम न छापने की शर्त पर एक आंगनबाड़ी सेविका ने बताया कि: “बस कागज़ी खानापूर्ति हो रही है। केंद्र में छोटे-छोटे बच्चे पढ़ते हैं, और इस घटिया वायरिंग से कभी भी कोई अनहोनी हो सकती है। हमारी चिंता जायज है, लेकिन इस पर कोई ध्यान नहीं दे रहा।”सेविकाओं ने यह भी आरोप लगाया है कि बिजली का काम कर रहे कर्मियों द्वारा उन सभी से जबरन सिग्नेचर करवाया जा रहा है, जबकि कार्य की गुणवत्ता बिल्कुल भी संतोषजनक नहीं है।

 

 

 

 

 

 

 

 

सुपरवाइजर ने भी मानी काम में कमी, बीडीओ को शिकायत

जब इस संबंध में कार्य कर रहे कर्मियों से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि उन्हें सुपरवाइजर के निर्देश पर भेजा गया है। वहीं, मामले की गंभीरता को देखते हुए जब सुपरवाइजर अंजली वर्मा से संपर्क किया गया, तो उन्होंने चौंकाने वाला खुलासा किया।सुपरवाइजर अंजली वर्मा ने दूरभाष पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा “कार्य तो संतोषजनक नहीं हो रहा है। इसकी शिकायत मैंने प्रखंड विकास पदाधिकारी यादव बैठा को कर दी है।” उन्होंने आगे बताया कि ‘आपके योजना आपके सरकार आपके द्वारा’ कार्यक्रम की व्यस्तता के कारण वह मौके पर मौजूद बिजली कर्मियों से बात नहीं कर पाई थीं। उन्होंने आश्वासन दिया कि सोमवार को उन कर्मियों को ऑफिस में बुलाकर बात करेंगी और कार्य को गुणवत्ता पूर्वक करने का सख्त निर्देश देंगी।

कागज़ों में सिमटेगी कार्रवाई या होगा गुणवत्तापूर्ण काम?

जब सुपरवाइजर स्वयं कार्य से संतुष्ट नहीं हैं, तो सवाल उठता है कि ऐसे घटिया काम को शुरू ही क्यों करवाया गया? अब सबकी निगाहें प्रखंड प्रशासन पर टिकी हैं। क्या बीडीओ की कार्रवाई के बाद आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए गुणवत्तापूर्ण कार्य होगा, या फिर यह मामला भी केवल कागज़ों में सिमटकर रह जाएगा?

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