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महुआ माजी की बढ़ीं मुश्किलें, बेटे पर JMM के सिंबल इस्तेमाल का आरोप

रांची: झारखंड में नगर निकाय चुनावों की रणभेरी बजते ही राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर चरम पर पहुंच गया है। शनिवार को यह मुकाबला तब और दिलचस्प हो गया जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल राज्य निर्वाचन आयोग के दफ्तर जा पहुंचा। भाजपा

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रांची: झारखंड में नगर निकाय चुनावों की रणभेरी बजते ही राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर चरम पर पहुंच गया है। शनिवार को यह मुकाबला तब और दिलचस्प हो गया जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल राज्य निर्वाचन आयोग के दफ्तर जा पहुंचा। भाजपा ने राज्यसभा सांसद महुआ माजी और उनके पुत्र सोमवित माजी के खिलाफ गंभीर शिकायतों का पुलिंदा आयोग को सौंपा है।

क्या है भाजपा का मुख्य आरोप

भाजपा विधि प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक सुधीर श्रीवास्तव के नेतृत्व में पहुंचे इस दल का दावा है कि वार्ड संख्या 18 से पार्षद पद के उम्मीदवार सोमवित माजी चुनावी नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। सुधीर श्रीवास्तव ने कहा कि चूंकि निकाय चुनाव ‘दलीय स्तर’ (Party Symbols) पर नहीं हो रहे हैं, ऐसे में सोमवित माजी झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के आधिकारिक चुनाव चिन्ह ‘तीर-धनुष’ वाले बैनर के सामने खड़े होकर मीडिया को बयान कैसे दे रहे हैं? भाजपा ने इसे मतदाताओं को भ्रमित करने की सोची-समझी साजिश करार दिया है।

पद के दुरुपयोग और बूथों की हेराफेरी का दावा

शिकायत में केवल सिंबल का मामला ही नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र के दुरुपयोग का मुद्दा भी छाया रहा। भाजपा का आरोप है कि महुआ माजी ने अपने सांसद पद का प्रभाव इस्तेमाल कर वार्ड 18 में चुनावी भूगोल बदलने की कोशिश की है। आरोप लगाया गया है कि क्षेत्र के बाहर रहने वाले लोगों के नाम भी मतदाता सूची में शामिल कर दो अतिरिक्त बूथ बनवाए गए हैं। इसके अलावा, क्षेत्र में लगी बेंचों पर सांसद के नाम के नीचे ‘निवेदक सोमवित माजी’ लिखकर प्रचार करने का नया तरीका अपनाया जा रहा है।

आयोग से FIR की मांग

भाजपा प्रतिनिधिमंडल, जिसमें विनय जायसवाल और सुबोध कांत भी शामिल थे, ने आयोग के सचिव राधेश्याम प्रसाद को लिखित ज्ञापन सौंपते हुए महुआ माजी और उनके पुत्र पर तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने की मांग की है। आयोग के सचिव ने पूरे मामले की जांच के बाद उचित कानूनी कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

चुनाव का गणित

गौरतलब है कि रांची समेत राज्य के 48 नगर निकायों के लिए 23 फरवरी को मतदान होना है। शनिवार को ही प्रत्याशियों को उनके चुनाव चिन्ह आवंटित किए गए हैं, जिसके तुरंत बाद इस नई कानूनी लड़ाई ने चुनाव के तापमान को और बढ़ा दिया है। अब देखना यह है कि निर्वाचन आयोग इस शिकायत पर क्या कड़ा रुख अपनाता है।

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