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Lohardaga News: लोहरदगा में ठंड ने अब शीतलहरी का रूप ले लिया है। बीते कुछ दिनों में तापमान तेजी से गिरा है और कनकनी ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। हालात ऐसे हैं कि सुबह देर तक घना कोहरा छाया रहता है और बाजारों में रौनक काफी देर से लौटती है। आम तौर पर सुबह 10 बजे के बाद ही चहल-पहल शुरू हो पा रही है, जबकि शाम ढलते ही सड़कों और बाजारों में सन्नाटा पसर जा रहा है।
सोमवार को जिले का न्यूनतम तापमान 5 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम 17 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। वहीं पेशरार और किस्को जैसे पहाड़ी इलाकों में ठंड और तीखी रही, जहां न्यूनतम तापमान 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक गिरने की जानकारी मिली है। मौसम जानकारों का कहना है कि अगले दो से तीन दिनों में ठंड और बढ़ सकती है, जिससे न्यूनतम तापमान में और गिरावट आने की संभावना है।
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घने कोहरे की वजह से धूप भी राहत नहीं दे पा रही है। सुबह करीब आठ-नौ बजे के बीच थोड़ी देर के लिए धूप निकलती है, लेकिन दोपहर तीन बजे के आसपास फिर से कोहरा छाने लगता है। इसका सबसे ज्यादा असर दिहाड़ी और मोटिया मजदूरों पर पड़ रहा है, जिनके लिए ठंड में काम करना मुश्किल हो गया है।
ठंड से बचाव के लिए लोग अलाव का सहारा ले रहे हैं। नगर परिषद कार्यालय ने शहर के प्रमुख चौक-चौराहों पर अलाव की व्यवस्था की है। नगर प्रशासक मुक्ति किड़ो ने बताया कि जनवरी माह भर यह व्यवस्था जारी रहेगी। साथ ही ठंड को देखते हुए लोहरदगा शहरी क्षेत्र में करीब 1100 जरूरतमंद लोगों को कंबल उपलब्ध कराए जाएंगे, जो अगले एक सप्ताह के भीतर बांटे जाएंगे।
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. किरण सिंह ने किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि बढ़ती ठंड और पाले से खड़ी रबी फसलों को नुकसान हो सकता है। इससे बचाव के लिए फसलों पर पानी का छिड़काव और धुआं करना सबसे प्रभावी उपाय है। साथ ही दुधारू पशुओं को भी ठंड से बचाने के लिए विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

