Lohardaga News: लोहरदगा जिले में इस बार ठंड ने जल्दी दस्तक दे दी है। दिन का तापमान जहां 21 डिग्री तक सीमित है, वहीं रात का पारा सीधे 9 डिग्री तक लुढ़क गया। तापमान में यह गिरावट किसानों के लिए चिंता की वजह बन गई है, क्योंकि खेतों की नमी और लगातार बढ़ती ठंड फसलों के विकास पर असर डाल सकती है।
कृषि विज्ञान केन्द्र ने दी जरूरी चेतावनी और सलाह
इन्हीं हालातों को देखते हुए कृषि विज्ञान केन्द्र, किस्को के प्रधान कृषि वैज्ञानिक डॉ. किरण सिंह ने किसानों के लिए महत्वपूर्ण सुझाव जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि ठंड से बचाने के लिए खेतों में सुबह–शाम हल्की सिंचाई करें। इससे तापमान का अचानक गिरना फसलों पर कम असर करेगा।
मटर की 25–30 दिन पुरानी फसल में समय पर निकाई–गुड़ाई करना जरूरी बताया गया है, ताकि पौधे मजबूत हो सकें।
साथ ही जिन किसानों ने खरीफ फसल की कटाई पूरी कर ली है, उन्हें अब गेहूं की बुवाई पर तुरंत ध्यान देने को कहा गया है। सिंचित क्षेत्रों के लिए उन्होंने कई उन्नत किस्मों का सुझाव दिया है—K 1006, HD 2967, DBW 39, बिरसा गेहूं-3 आदि। वहीं असिंचित भूमि के लिए K 1317 और HI 1612 सर्वोत्तम मानी गई हैं। बीज को बुवाई से पहले कार्बेन्डाजिम या बीटावेक्स से उपचारित करने पर विशेष जोर दिया गया है ताकि बीमारियां पनप न सकें।
चना और सब्जी फसलों पर भी मौसम का असर
चना की खेती करने वाले किसानों को खेत अच्छी तरह तैयार करने की सलाह दी गई है, खासकर उस भूमि में जहां पानी नहीं रुकता हो। देशी चना के लिए BG 3043 और बिरसा चना–3 को बेहतर किस्म बताया गया है।
सब्जियों में भी अब रोग बढ़ने का खतरा बढ़ गया है। गोभी में ‘डायमंड बैक मोथ’ की आशंका को देखते हुए स्पिनोसैड का छिड़काव करने की सलाह दी गई है। वहीं बढ़ती नमी और कोहरे के कारण टमाटर में लेट ब्लाइट की संभावना भी अधिक है, जिसके लिए विशेष दवा का छिड़काव करने को कहा गया है।
डॉ. सिंह ने किसानों से कहा कि मौसम के बदलते स्वरूप को हल्के में न लें और फसलों की सुरक्षा समय रहते सुनिश्चित करें।



