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Home»World»फैक्ट्री में मजदूर फिर बने वकील और दक्षिण कोरिया के चुने गए राष्ट्रपति
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फैक्ट्री में मजदूर फिर बने वकील और दक्षिण कोरिया के चुने गए राष्ट्रपति

By Samsul HaqueJune 5, 20253 Mins Read
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World News: दक्षिण कोरिया में राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे लगभग साफ हो चुके हैं। इस चुनाव में उदारवादी उम्मीदवार ली जे-म्युंग ने जीत का दावा किया है। वहीं उनके प्रतिद्वंद्वी किम मून सू ने हार मार ली है। यह राजनीतिक घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है, जब पूर्व राष्ट्रपति यूं सुक-योल को मार्शल लॉ की विफल योजना के कारण महाभियोग का सामना करना पड़ा था और देश गंभीर राजनीतिक संकट में चला गया था। जब 70 फीसदी वोटों की गिनती हो चुकी थी, तब ली जे-म्युंग को 48.523 फीसदी वोट मिल चुके थे, जिससे उन्हें निर्णायक बढ़त हासिल हो गई। इसी चरण में उनके प्रतिद्वंद्वी सू ने अपनी हार मान ली है।

2010 में सेओंगनाम शहर के मेयर बनने के बाद हुई राजनीतिक शुरआत

ली जे-म्युंग का जीवन गरीबी से अमीरी की ओर बढ़ने वाली प्रेरणादायक कहानी की तरह है। वह कभी फैक्ट्री में मजदूरी करते थे और फिर मानवाधिकार वकील बने, अब देश के नए राष्ट्रपति चुन लिए गए हैं। म्युंग का जन्म 1963 में एक बेहद गरीब परिवार में हुआ था। उन्होंने प्राथमिक शिक्षा के बाद ही फैक्ट्री में काम करना शुरू कर दिया था, लेकिन वहां एक हादसे में उनके हाथ में गहरी चोट लग गई और उसने काम करना बंद कर दिया। हालांकि इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और पढ़कर कानून की डिग्री हासिल की।

वकालत की पढ़ाई करके उन्होंने एक मानवाधिकार वकील के तौर पर काम किया। राजनीति में उनकी शुरुआत 2010 में सेओंगनाम शहर के मेयर के रूप में हुई थी। इसके बाद वे ग्योंग्गी प्रांत के गवर्नर बने, जो दक्षिण कोरिया का सबसे ज्यादा जनसंख्या वाला क्षेत्र है। ली 2022 के राष्ट्रपति चुनाव में यूं सुक-योल से बहुत कम अंतर से हारे थे, लेकिन 2024 के राजनीतिक संकट के बाद अब उन्होंने जोरदार वापसी की है। दिसंबर 2024 में जब यूं ने मार्शल लॉ लागू करने का असफल प्रयास किया तब ली ने लाइवस्ट्रीम कर संसद की बाउंड्री फांदते हुए प्रवेश किया, जिससे देशभर में विरोध प्रदर्शन की आग और भड़क उठी और आखिरकार यूं को महाभियोग का सामना करना पड़ा।

ली का अभियान सत्तावादी रवैये को रोकने, आर्थिक और संवैधानिक सुधारों के वादों पर केंद्रित था। उन्होंने कहा कि वह राष्ट्रपति पद को दो चार वर्षीय कार्यकाल वाला बनाना चाहते हैं, जिससे स्थिर शासन व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके। अंतरराष्ट्रीय नीति में वह अमेरिका के साथ संबंधों को संतुलित रखते हुए चीन और उत्तर कोरिया के साथ भी कूटनीतिक वार्ता के जरिए रिश्तों को सुधारना चाहते हैं। उन्होंने अमेरिकी टैरिफ खतरों से निपटने के लिए आर्थिक रणनीति तैयार करने का भी वादा किया है।

ली जे-म्युंग का करियर विवादों से भी अछूता नहीं रहा है। उन पर रिश्वतखोरी और संपत्ति विकास घोटाले के गंभीर आरोप लगे हैं। एक अन्य मामले में उन्हें चुनावी कानून का उल्लंघन करने का दोषी ठहराया गया था, जिसमें उन पर पिछली चुनावी बहस के दौरान जानबूझकर झूठे बयान देने का आरोप लगा था। ली ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है और कहा है कि ये आरोप राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं और इनमें कोई कानूनी आधार नहीं है।

दिसंबर में एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा था कि ये आरोप सत्ता में उनकी बढ़ती लोकप्रियता को रोकने का प्रयास हैं। ली जे-म्युंग की जीत दक्षिण कोरिया की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत है, जहां सामाजिक न्याय, लोकतंत्र की रक्षा और कूटनीतिक संतुलन को नई प्राथमिकता दी जा रही है। उनके सामने कई चुनौतियां हैं जिसमें चाहे वह घरेलू विपक्ष हो या अंतरराष्ट्रीय दबाव लेकिन उनके जीवन की संघर्षभरी पृष्ठभूमि और जनसमर्थन को देखते हुए उनके नेतृत्व से बड़ी उम्मीदें लगाई जा रही हैं।

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