फॉण्ट कनवर्टर NEW

राजकीय शोक से लेकर श्रद्धांजलि तक – जानिए कैसे झारखंड ने दी रामदास सोरेन को विदाई

Ranchi News: झारखंड के शिक्षा मंत्री और झामुमो नेता रामदास सोरेन के निधन की खबर ने पूरे राज्य को गहरे सदमे में डाल दिया। शुक्रवार की रात दिल्ली के अपोलो अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। वे बीते 2 अगस्त से गंभीर हालत में अस्पताल

अपनी भाषा में पढ़ें

Ranchi News: झारखंड के शिक्षा मंत्री और झामुमो नेता रामदास सोरेन के निधन की खबर ने पूरे राज्य को गहरे सदमे में डाल दिया। शुक्रवार की रात दिल्ली के अपोलो अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। वे बीते 2 अगस्त से गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती थे, जहां उनकी स्थिति लगातार नाजुक बनी हुई थी।

रामदास सोरेन नहीं रहे: पूरे झारखंड ने दी अंतिम विदाई, भावुक हुई राजनीति से लेकर आम जनता तक

शनिवार की सुबह जब उनका पार्थिव शरीर दिल्ली से रांची एयरपोर्ट पहुंचा तो पूरा माहौल भावुक हो उठा। एयरपोर्ट पर ही राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार, विधानसभा अध्यक्ष रवींद्र नाथ महतो, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर, पूर्व मंत्री मिथिलेश ठाकुर, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, पूर्व मंत्री बादल पत्रलेख, राज्यसभा सांसद महुआ माझी, लोकसभा सांसद जोबा मांझी और मुख्य सचिव अलका तिवारी सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। सभी ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए।

विधानसभा में नम हुई आंखें

एयरपोर्ट से उनका पार्थिव शरीर सीधे विधानसभा परिसर ले जाया गया। यहां भावुक माहौल के बीच विधायकों, मंत्रियों और अधिकारियों ने श्रद्धांजलि दी। विधानसभा अध्यक्ष रवींद्र नाथ महतो ने कहा – “रामदास सोरेन का असमय जाना हमारे लिए बड़ी क्षति है। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दें।”

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि उनका निधन केवल राजनीति ही नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए अपूरणीय नुकसान है। वहीं, राज्यपाल संतोष गंगवार ने उनके पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित किया और शोकाकुल परिजनों से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की।

झामुमो कार्यकर्ताओं का उमड़ा हुजूम

रामदास सोरेन झारखंड मुक्ति मोर्चा के मजबूत कंधों में से एक थे। उनकी अंतिम यात्रा में पार्टी के केंद्रीय और जिला स्तर के पदाधिकारी और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में शामिल हुए। केंद्रीय महासचिव सह प्रवक्ता विनोद कुमार पांडेय, सुप्रियो भट्टाचार्य और मनोज पांडेय सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।

रांची जिला संयोजक प्रमुख मुस्ताक आलम के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पदाधिकारी और कार्यकर्ता पहुंचे। पवन जेडीया, बीरू तिर्की, धर्मेंद्र सिंह, संध्या गुड़िया, समनूर मंसूरी, कलाम आजाद, जनक नायक, अफरोज अंसारी, संजय राय, अंशु लकड़ा, रोमा सरकार, अवधेश यादव समेत कई अन्य ने श्रद्धांजलि दी। पूरा वातावरण गमगीन था और ‘रामदास सोरेन अमर रहें’ के नारों से गूंज उठा।

राजकीय शोक की घोषणा

राज्य सरकार ने शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन के निधन पर शनिवार को एक दिवसीय राजकीय शोक की घोषणा की। सचिवालय और निगरानी विभाग की ओर से आदेश जारी किया गया कि 16 अगस्त को झारखंड भर में सभी सरकारी भवनों पर राष्ट्रीय ध्वज आधे झुके रहेंगे। साथ ही किसी भी तरह के राजकीय कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जाएंगे।

इस घोषणा से साफ झलक रहा था कि राज्य सरकार ने उन्हें कितनी इज्जत और सम्मान दिया। यह दिन झारखंड की राजनीति में एक काले दिन के रूप में याद किया गया।

कैसे बिगड़ी तबीयत?

रामदास सोरेन की तबीयत अचानक 2 अगस्त की सुबह बिगड़ी थी। वे अपने जमशेदपुर स्थित आवास के बाथरूम में गिर पड़े थे। उनके सिर पर गंभीर चोटें आईं और दिमाग में ब्लड क्लॉट हो गया। आनन-फानन में उन्हें जमशेदपुर के टाटा मोटर्स अस्पताल ले जाया गया। वहां से हालत गंभीर होने पर उन्हें एयरलिफ्ट कर दिल्ली के अपोलो अस्पताल भेजा गया।

कई दिनों तक डॉक्टरों की टीम इलाज करती रही, लेकिन उनकी स्थिति लगातार गंभीर बनी रही और अंततः 15 अगस्त की रात उन्होंने अंतिम सांस ली।

राजनीति और समाज के प्रति समर्पित जीवन

रामदास सोरेन का राजनीतिक जीवन बेहद सक्रिय और संघर्षशील रहा। वे सरल स्वभाव, जमीन से जुड़े और गरीब तबके के उत्थान के लिए समर्पित नेता माने जाते थे। शिक्षा मंत्री के रूप में उन्होंने राज्य की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में कई प्रयास किए।

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने उन्हें याद करते हुए कहा – “वे शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का साधन मानते थे और लगातार सुधार के लिए संघर्षरत रहे। उनकी कमी झारखंड की जनता हमेशा महसूस करेगी।”

जनता का नेता

रामदास सोरेन की अंतिम यात्रा केवल नेताओं तक सीमित नहीं रही। आम जनता भी भारी संख्या में उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंची। ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरी इलाकों तक के लोग भावुक मन से उनके पार्थिव शरीर को नमन करने आए।

लोग कहते हैं कि वे जनता के बीच रहने वाले नेता थे। शिक्षा, समाज और राजनीति – तीनों ही क्षेत्रों में उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा।

अंतिम यात्रा की तैयारियां और श्रद्धांजलि

विधानसभा में श्रद्धांजलि के बाद उनके पार्थिव शरीर को घाटशिला स्थित उनके पैतृक आवास ले जाया गया। वहां भी लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। प्रशासन ने व्यवस्था बनाए रखने के लिए विशेष इंतजाम किए थे।

सड़क किनारे लोग हाथ जोड़कर खड़े थे। हर कोई उनकी झलक पाने और अंतिम प्रणाम करने को आतुर था। उनकी अंतिम यात्रा एक नेता के नहीं बल्कि एक जनसेवक की विदाई जैसी थी।

झारखंड की राजनीति में खाली हुई जगह

रामदास सोरेन के निधन से झारखंड की राजनीति में एक बड़ा खालीपन पैदा हो गया है। उनके योगदान को लेकर सभी दलों के नेताओं ने उन्हें याद किया। उनकी छवि एक साफ-सुथरे, कर्मठ और जनता के प्रति समर्पित नेता की रही।

राज्यपाल, मुख्यमंत्री, विपक्षी नेता, मंत्री और कार्यकर्ता – सभी ने उनकी कमी को अपूरणीय क्षति करार दिया। यह कहना गलत नहीं होगा कि आने वाले वर्षों तक झारखंड की जनता उन्हें याद करती रहेगी।

WhatsApp Group जुड़ने के लिए क्लिक करें 👉 Join Now
Facebook
X
Threads
WhatsApp
Telegram