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सूखे की आहट के बीच एक्शन : 20 मई को जिलों और 22 को प्रखंडों में लगेगा खरीफ मेला

रांची: झारखंड की कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने स्पष्ट कर दिया है कि किसानों के उत्थान और उनके हितों की रक्षा के लिए राज्य सरकार किसी भी स्तर पर समझौता नहीं करेगी। मंगलवार को बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (BAU) में आयोजित ‘खरीफ कर्मशाला 2026’ के

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रांची: झारखंड की कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने स्पष्ट कर दिया है कि किसानों के उत्थान और उनके हितों की रक्षा के लिए राज्य सरकार किसी भी स्तर पर समझौता नहीं करेगी। मंगलवार को बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (BAU) में आयोजित ‘खरीफ कर्मशाला 2026’ के समापन सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने अधिकारियों को सख्त लहजे में चेतावनी दी कि किसानों के काम में लापरवाही बरतने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जबकि बेहतर प्रदर्शन करने वालों को सम्मानित किया जाएगा।

सूखे की आशंका और ‘वॉट्सऐप’ नहीं, ग्राउंड एक्शन की जरूरत

मौसम विभाग के पूर्वानुमानों का हवाला देते हुए मंत्री ने कहा कि इस वर्ष मानसून में कम बारिश की संभावना है, जिससे राज्य में सूखे जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। उन्होंने कहा, “समय ही किसान की सबसे बड़ी पूंजी है। अगर उसे सही समय पर बीज, खाद और सिंचाई की सुविधा नहीं मिली, तो हमारी सारी योजनाएं और कागजी मेहनत बेकार है।” उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे एक ‘सेना’ की तरह काम करें, जहां जिला कृषि पदाधिकारी (DAO) नोडल कमांडर की भूमिका में रहेंगे।

गांव-गांव तक पहुंचेगी तकनीक और सहायता

मंत्री ने रणनीतिक रोडमैप साझा करते हुए अधिकारियों को निम्नलिखित समय-सीमा (Deadlines) दी हैं:

  • 15 मई: सभी जिलों में जिला स्तरीय बैठकें होंगी, जिसमें प्रखंड स्तरीय अधिकारियों को कर्मशाला की योजनाओं से अवगत कराया जाएगा।

  • 20 मई: हर जिले में भव्य ‘खरीफ मेला’ आयोजित होगा, जिसमें प्रत्येक जिले से 500 प्रगतिशील किसान शामिल होंगे।

  • 22 मई: प्रखंड स्तर पर मेलों का आयोजन होगा, जिसमें हर पंचायत से कम से कम 50 किसानों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

बुनियादी ढांचे पर विशेष जोर

शिल्पी नेहा तिर्की ने केवल खेती ही नहीं, बल्कि उससे जुड़े अन्य पहलुओं पर भी पैनी नजर रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मई के अंत तक तालाबों के जीर्णोद्धार का कार्य हर हाल में पूरा हो जाना चाहिए ताकि वर्षा जल का संचयन हो सके। इसके अलावा पशुओं की दवाओं के वितरण, सोलर पंप योजना, मधुमक्खी पालन और भूमि संरक्षण की योजनाओं में पारदर्शिता और तेजी लाने के निर्देश दिए गए।

कुलपति की सलाह: जल संरक्षण ही समाधान

इस अवसर पर बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एस.सी. दुबे ने भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि गिरते भू-जल स्तर को देखते हुए जल संरक्षण ही एकमात्र विकल्प है। उन्होंने किसानों को आय के वैकल्पिक स्रोत अपनाने के लिए प्रेरित करने पर जोर दिया। कर्मशाला के दौरान धान की नई किस्मों और सूखे से निपटने की तैयारियों पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म भी दिखाई गई, ताकि अधिकारी तकनीकी रूप से सशक्त होकर मैदान में उतर सकें।

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