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JSLPS ने कार्यशालाओं व एक्सपोजर विजिट का आयोजन कर महिला उद्यमिता को दिया बढ़ावा

Ranchi : महिला उद्यम विकास को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) ने एक नई पहल शुरू की है। राज्य के रांची, बोकारो, पश्चिम सिंहभूम, देवघर और पलामू जिलों में इमर्शन पंचायतों और इमर्शन केंद्रों के विकास को गति दी

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Ranchi : महिला उद्यम विकास को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) ने एक नई पहल शुरू की है। राज्य के रांची, बोकारो, पश्चिम सिंहभूम, देवघर और पलामू जिलों में इमर्शन पंचायतों और इमर्शन केंद्रों के विकास को गति दी जा रही है। इस दिशा में हाल ही में सीईओ JSLPS अनन्य मित्तल की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय बैठक आयोजित हुई, जिसमें लिए गए निर्णयों के अनुरूप जिला स्तर पर कार्यशालाएं और एक्सपोज़र विज़िट्स आयोजित की गईं।

इन कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य महिला उद्यमियों को सशक्त बनाना, उनकी पहचान करना और उन्हें वित्तीय संसाधनों तक आसान पहुँच उपलब्ध कराना था। साथ ही, बैंकिंग सहयोग बढ़ाने, ऋण स्वीकृति व वितरण प्रक्रिया को सरल बनाने तथा उच्च गुणवत्ता वाले इमर्शन केंद्र और वन-स्टॉप फैसिलिटी सेंटर (OSF) विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया।

जिला उप-विकास आयुक्तों (DDCs) की अध्यक्षता में आयोजित कार्यशालाओं में JSLPS के राज्य स्तरीय अधिकारी, जिला कार्यक्रम प्रबंधक, Sa-Dhan संस्थान के प्रतिनिधि, बैंक अधिकारी और अन्य हितधारक शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान बैंक अधिकारियों ने सफल महिला उद्यमियों की पहलों का प्रत्यक्ष अनुभव लिया। इमर्शन केंद्रों को “डेमोंस्ट्रेशन हब” के रूप में विकसित करने की विस्तृत कार्ययोजना पर सहमति बनी।

पात्र स्वयं सहायता समूह (SHG) सदस्यों को मुद्रा ऋण उपलब्ध कराने में बैंकों की सक्रिय भूमिका सुनिश्चित करने के लिए भी ठोस निर्णय लिए गए। बैंक अधिकारियों और SHG सदस्यों के बीच संवाद से पारदर्शिता और विश्वास का माहौल मजबूत हुआ। ऋण स्वीकृति एवं वितरण प्रक्रिया को तेज, सरल और स्पष्ट बनाने की रणनीति तय की गई।

SLBC सब-कमेटी (DAY-NRLM) के सदस्यों ने रांची में आयोजित एक्सपोज़र विज़िट में भाग लेते हुए लंबित ऋण आवेदनों को शीघ्र स्वीकृत करने का आश्वासन दिया। जिला स्तर पर इमर्शन केंद्रों के विकास के लिए समय-सीमा, गुणवत्ता नियंत्रण और निगरानी व्यवस्था की रूपरेखा भी तय की गई।

जिला उप-विकास आयुक्तों ने निर्देश दिया कि महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने, बैंकिंग सहयोग को मजबूत करने और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सभी विभाग समयबद्ध व समन्वित तरीके से कार्य सुनिश्चित करें। आने वाले 3–4 महीनों में चयनित प्रखंडों में उच्च गुणवत्ता वाले इमर्शन केंद्र विकसित किए जाएंगे, और इनसे प्राप्त अनुभव राज्य के अन्य जिलों में साझा किए जाएंगे।

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