Ranchi News : झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की रांची जिला समिति की ओर से सोमवार को राजधानी रांची के अल्बर्ट एक्का चौक के समीप एक विशेष प्रसाद वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री और झामुमो के संस्थापक दिशोम गुरु शिबू सोरेन जी के श्राद्धकर्म के उपलक्ष्य में रखा गया था।

इस अवसर पर बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और आमजन मौजूद रहे। कार्यक्रम का नेतृत्व झामुमो रांची जिला संयोजक प्रमुख मुस्ताक आलम ने किया। उन्होंने कहा कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन जी ने झारखंड की अस्मिता और आदिवासी समाज के हक-अधिकार के लिए जीवन भर संघर्ष किया। उनके श्राद्धकर्म के अवसर पर यह प्रसाद वितरण, उनके विचारों और आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने का एक छोटा प्रयास है।

कार्यक्रम में झामुमो के कई केंद्रीय सदस्य और जिला संयोजक मंडली के सदस्य मौजूद रहे। इसमें मुख्य रूप से अश्विनी शर्मा, पवन जेडीया, डॉ. हेमलाल मेहता, धर्मेंद्र सिंह, नयनतारा उरांव, बीरू तिर्की, झब्बूलाल महतो, सोनू मुंडा और समनूर मंसूरी शामिल थे। इसके अलावा बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने सक्रिय भूमिका निभाते हुए श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया।

अल्बर्ट एक्का चौक पर आयोजित इस कार्यक्रम में श्रद्धालुओं का उत्साह देखने लायक था। लोग दूर-दूर से प्रसाद ग्रहण करने पहुंचे और दिशोम गुरु शिबू सोरेन अमर रहें”, “अंतिम जोहार जैसे नारों से वातावरण गूंज उठा। कई कार्यकर्ताओं ने कहा कि यह प्रसाद वितरण केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि शिबू सोरेन जी के आदर्शों को याद करने और उनके दिखाए रास्ते पर चलने का संकल्प लेने का अवसर भी है।

झामुमो नेताओं ने बताया कि शिबू सोरेन जी ने हमेशा गरीब, मजदूर, किसान और आदिवासी समाज की आवाज बुलंद की। आज उनका जाना झारखंड की राजनीति और समाज के लिए अपूरणीय क्षति है, लेकिन उनके विचार सदैव प्रेरणा देते रहेंगे।

प्रसाद वितरण में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने भाग लिया जिनमें आदिल इमाम, कलाम आजाद, जीत गुप्ता, सज्जाद अंसारी, सुजीत कुजूर, आशुतोष वर्मा, अंकिता वर्मा, मनिंदर सिंह, गोपाल पांडेय, अवधेश यादव, दीपक झा, अरुण कुमार, मुस्लिम अंसारी, नीरज भूषण, संतोष राणा, आयुष राज वर्मा, कुलदीपक कुमार, नितेश सिन्हा, राहुल यादव समेत कई अन्य कार्यकर्ता शामिल रहे।

पूरे कार्यक्रम के दौरान माहौल भावुक और श्रद्धामय रहा। अंत में झामुमो नेताओं और कार्यकर्ताओं ने दिशोम गुरु शिबू सोरेन जी को अंतिम जोहार अर्पित किया और उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।

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