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झारखंड टेंडर घोटाला : इंजीनियर अजय कुमार का सरेंडर, PMLA कोर्ट से मिली सशर्त जमानत

रांची: झारखंड के ग्रामीण विकास विभाग में हुए करोड़ों रुपये के चर्चित टेंडर घोटाले में शुक्रवार को एक और बड़ी कानूनी हलचल देखने को मिली। मामले के आरोपित अधिशाषी अभियंता (एग्जीक्यूटिव इंजीनियर) अजय कुमार ने रांची स्थित पीएमएलए (PMLA) की विशेष अदालत में आत्मसमर्पण कर

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रांची: झारखंड के ग्रामीण विकास विभाग में हुए करोड़ों रुपये के चर्चित टेंडर घोटाले में शुक्रवार को एक और बड़ी कानूनी हलचल देखने को मिली। मामले के आरोपित अधिशाषी अभियंता (एग्जीक्यूटिव इंजीनियर) अजय कुमार ने रांची स्थित पीएमएलए (PMLA) की विशेष अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। सरेंडर के तुरंत बाद अदालत ने उन्हें सशर्त जमानत प्रदान कर दी है।

पासपोर्ट जमा करने का आदेश

विशेष अदालत ने अजय कुमार की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हें एक लाख रुपये के निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया। हालांकि, अदालत ने कड़ी शर्तें भी लागू की हैं। उन्हें अपना पासपोर्ट अदालत में जमा करना होगा और बिना न्यायिक अनुमति के देश छोड़ने पर पूरी तरह पाबंदी रहेगी। अजय कुमार वर्तमान में ग्रामीण विकास विभाग में कार्यरत हैं, जिससे विभागीय गलियारों में भी बेचैनी बढ़ गई है।

कैसे खुला कमीशन का यह ‘पेंडोरा बॉक्स’?

इस पूरे घोटाले की जड़ें साल 2019 में जमशेदपुर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) में दर्ज एक प्राथमिकी से जुड़ी हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जब इस मामले की कमान संभाली, तो एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ। जांच में पता चला कि ग्रामीण विकास विभाग में टेंडर आवंटन के बदले 3 प्रतिशत कमीशन लेने का एक सुव्यवस्थित और ‘ऑर्गेनाइज्ड नेटवर्क’ काम कर रहा था। यह कमीशन की राशि निचले स्तर से लेकर ऊपर तक एक तय व्यवस्था के तहत बांटी जाती थी।

ईडी की अब तक की बड़ी कार्रवाई

ईडी ने इस घोटाले की तह तक जाने के लिए झारखंड, बिहार और दिल्ली समेत 52 ठिकानों पर छापेमारी की है। जांच एजेंसी की इस बड़ी कार्रवाई में अब तक जो सामने आया है, वह हैरान करने वाला है:

  • गिरफ्तारी: पूर्व मंत्री आलमगीर आलम और उनके निजी सचिव समेत कुल 9 लोग जेल जा चुके हैं।

  • नकदी और संपत्ति: अब तक लगभग 38 करोड़ रुपये नकद बरामद किए जा चुके हैं और 44 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की गई है।

  • लग्जरी गाड़ियां: जांच के दौरान 8 महंगी गाड़ियां भी जब्त की गई हैं।

हाल ही में ईडी ने 14 अन्य आरोपितों के खिलाफ पूरक आरोप पत्र (Supplementary Charge Sheet) दाखिल किया था, जिस पर संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने समन जारी किए थे। अजय कुमार का सरेंडर इसी कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है। फिलहाल ईडी वित्तीय लेनदेन के अन्य पहलुओं और बिचौलियों की भूमिका की गहन जांच कर रही है, जिससे आने वाले दिनों में कुछ और बड़े चेहरों पर गाज गिर सकती है।

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