Ranchi: झारखंड में नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने की दिशा में सुरक्षा बलों और राज्य सरकार को आज एक ऐतिहासिक सफलता हाथ लगी है। राजधानी रांची में झारखंड पुलिस के महानिदेशक (DGP) के समक्ष 27 हार्डकोर नक्सलियों ने एक साथ आत्मसमर्पण (Surrender) कर हिंसा का रास्ता छोड़ मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है। इस सामूहिक आत्मसमर्पण के बाद माना जा रहा है कि सूबे के सबसे अशांत रहे सारंडा और कोल्हान के जंगलों में नक्सलवाद अब अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है।

गोद में 1 साल का बच्चा लिए महिला ने बंदूक छोड़ चुना मुख्यधारा का रास्ता

आत्मसमर्पण करने वालों में कई महिला नक्सली भी शामिल हैं। इस दौरान पुलिस मुख्यालय में एक बेहद भावुक करने वाला दृश्य भी सामने आया, जब एक महिला नक्सली मंच पर अपने एक साल से भी छोटे बच्चे को गोद में लेकर सरेंडर करने पहुंची और बंदूक छोड़कर अपने बच्चे के बेहतर भविष्य को चुना।

मिसिर बेसरा दस्ते के टॉप कमांडर शामिल

एक करोड़ रुपये के इनामी और झारखंड के सबसे कुख्यात माओवादी मिसिर बेसरा ने भले ही अभी हथियार न डाले हों, लेकिन आज आत्मसमर्पण करने वालों में उसके और असीम मंडल के मारक दस्ते (स्ट्राइक टीम) के टॉप कमांडर शामिल हैं। ये सभी लंबे समय से कोल्हान और सारंडा के घने जंगलों में सुरक्षा बलों के खिलाफ सक्रिय थे। सरेंडर करने वाले नक्सलियों में से 25 माओवादी केंद्रीय कमेटी से जुड़े हैं, जिनमें 6 सब जोनल कमेटी सदस्य, 6 एरिया कमेटी सदस्य और 13 सक्रिय दस्ता सदस्य शामिल हैं। इसके अलावा, गुमला जिले में भी जेजेएमपी (JJMP) संगठन के दो उग्रवादियों ने पुलिस के सामने हथियार डाले हैं।

8 नक्सलियों पर था 33 लाख रुपये का इनाम

पुलिस से मिली आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, सरेंडर करने वाले नक्सलियों में से 8 ऐसे हार्डकोर माओवादी हैं, जिनकी गिरफ्तारी पर सरकार ने कुल 33 लाख रुपये का सामूहिक इनाम घोषित कर रखा था। हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश से नक्सलवाद के पूर्ण खात्मे का संकल्प दोहराया था। केंद्र व राज्य सरकार की प्रभावी पुनर्वास नीति और सुरक्षा बलों के ‘ऑपरेशन डबल बुल’ जैसे लगातार बढ़ते चौतरफा दबाव के चलते ही नक्सलियों को हथियार डालने पर मजबूर होना पड़ा है।

घातक हथियारों और कारतूसों का जखीरा बरामद

मुख्यधारा में लौटते हुए इन माओवादियों ने देश की सुरक्षा को दांव पर लगाने वाले बड़ी मात्रा में घातक हथियार और कारतूस भी पुलिस को सौंपे हैं। जमा किए गए हथियारों के जखीरे में:

  • 1 इंसास एलएमजी (Insas LMG)

  • 4 इंसास राइफल (Insas Rifle)

  • 9 एसएलआर राइफल (SLR Rifle)

  • 1 .303 राइफल और देसी पिस्टल

  • कुल 2,857 जिंदा कारतूस (गोलियां)

इतनी बड़ी तादाद में अत्याधुनिक हथियारों की बरामदगी और शीर्ष कमांडरों के आत्मसमर्पण ने प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) संगठन की रीढ़ तोड़ दी है। इस कदम से झारखंड के सुदूर ग्रामीण और आदिवासी बहुल इलाकों में शांति बहाली तथा विकास कार्यों को तेज करने की उम्मीदें और मजबूत हो गई हैं।

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