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झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा कदम, बीएयू वीसी सहित अधिकारियों को नोटिस

Ranchi : बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) के अशैक्षणिक कर्मचारियों को एसीपी/एमएसीपी (Assured Career Progression / Modified Assured Career Progression) का लाभ देने से जुड़े मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य सरकार और बीएयू प्रशासन पर नाराजगी जताते हुए अवमानना

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Ranchi : बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) के अशैक्षणिक कर्मचारियों को एसीपी/एमएसीपी (Assured Career Progression / Modified Assured Career Progression) का लाभ देने से जुड़े मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य सरकार और बीएयू प्रशासन पर नाराजगी जताते हुए अवमानना (Contempt) नोटिस जारी किया है। यह नोटिस पूर्व में दिए गए न्यायालय के आदेश का पालन नहीं करने के कारण जारी किया गया है।

यह मामला W.P.(S) No. 5581/2024 से जुड़ा है, जिसमें 17 अक्टूबर 2024 को न्यायमूर्ति एस.एन. पाठक ने स्पष्ट निर्देश दिया था कि विश्वविद्यालय द्वारा 9 अगस्त 1989 और 1 अगस्त 2009 से एसीपी/एमएसीपी लाभ देने का निर्णय वैध और उचित है। अदालत ने यह भी कहा था कि कर्मचारियों के मामलों पर W.P.(S) No. 1563/2017 के अनुरूप चार सप्ताह के भीतर अंतिम निर्णय लिया जाए। यदि मामला समान पाया जाता है, तो कर्मचारियों को समान लाभ दिया जाए।

हालांकि, राज्य सरकार द्वारा बीएयू की अनुशंसा पर समय पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। 31 अक्टूबर 2025 को हुई सुनवाई के दौरान भी अदालत ने टिप्पणी की थी कि राज्य सरकार अब तक इस विषय पर निर्णय लेने में असफल रही है। उस समय सरकार को चार सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया गया था, लेकिन निर्धारित अवधि के बाद भी आदेश का पालन नहीं हुआ।

इसके बाद 5 दिसंबर 2025 को हुई सुनवाई में न्यायमूर्ति अनंदा सेन ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि 17 अक्टूबर 2024 का आदेश अब तक लागू नहीं हुआ है। इसे गंभीरता से लेते हुए अदालत ने बीएयू के कुलपति सहित राज्य सरकार के 1 से 6 क्रमांक तक के संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना का नोटिस जारी किया। अदालत ने निर्देश दिया कि नोटिस स्पीड पोस्ट और सामान्य डाक दोनों माध्यमों से भेजा जाए।

इसके साथ ही, हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को अगली सुनवाई की तारीख पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया है। उन्हें यह स्पष्ट करना होगा कि न्यायालय के आदेश की अवहेलना करने पर उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही क्यों न चलाई जाए। अदालत ने केस से जुड़ी आदेश प्रति भी सभी पक्षों को भेजने के निर्देश दिए हैं।

मामले की अगली सुनवाई आठ सप्ताह बाद तय की गई है। इस फैसले के बाद बीएयू के कर्मचारी संगठनों में संतोष का माहौल है। शिक्षाक्षेत्र कर्मचारी संघ, बीएयू ने अदालत की सख्त कार्रवाई का स्वागत करते हुए कहा है कि वर्षों से लंबित मामलों में सरकार की देरी कर्मचारियों के साथ अन्याय है। संगठन ने उम्मीद जताई है कि हाईकोर्ट के इस कदम से अब कर्मचारियों को उनका हक मिलने की प्रक्रिया में तेजी आएगी।

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