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अवैध कोयला खनन पर झारखंड हाईकोर्ट नाराज, संपत्ति सीज कर राजस्व वसूली के दिए संकेत

Ranchi : झारखंड के पाकुड़ जिले में स्थित पैनम कोल माइंस द्वारा कथित रूप से किए गए अवैध कोयला खनन, उसकी सीबीआई जांच और खनन से प्रभावित विस्थापित परिवारों के पुनर्वास की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर सोमवार को झारखंड उच्च न्यायालय में

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Ranchi : झारखंड के पाकुड़ जिले में स्थित पैनम कोल माइंस द्वारा कथित रूप से किए गए अवैध कोयला खनन, उसकी सीबीआई जांच और खनन से प्रभावित विस्थापित परिवारों के पुनर्वास की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर सोमवार को झारखंड उच्च न्यायालय में अहम सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने पंजाब पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाते हुए कड़ी नाराजगी जताई।

मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पंजाब पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ने अब तक अदालत में अपना जवाब दाखिल नहीं किया है, जो अत्यंत गंभीर विषय है। अदालत ने निगम को निर्देश दिया कि वह अपनी सभी चल-अचल संपत्तियों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करे। साथ ही कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि यदि लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो क्यों न कंपनी की संपत्तियों को सीज कर उनकी नीलामी के माध्यम से राज्य को हुए राजस्व नुकसान की भरपाई की जाए।

खंडपीठ ने अपने आदेश में यह भी कहा कि प्रारंभिक तथ्यों से प्रतीत होता है कि पंजाब पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन पैनम कोल माइंस के साथ मिलकर खनन कार्य में सहभागी रही है। ऐसे में कंपनी अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकती। अदालत ने इस पूरे मामले को गंभीर मानते हुए सभी संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।

इस जनहित याचिका की अगली सुनवाई 6 जनवरी को निर्धारित की गई है। तब तक अदालत ने पंजाब पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन समेत अन्य संबंधित संस्थाओं को आवश्यक शपथ पत्र और दस्तावेज दाखिल करने का निर्देश दिया है।

गौरतलब है कि पैनम माइंस नामक कंपनी को वर्ष 2015 में झारखंड सरकार द्वारा पाकुड़ और दुमका जिलों में कोयला खनन के लिए लीज दी गई थी। आरोप है कि कंपनी ने स्वीकृत लीज क्षेत्र से बाहर जाकर और निर्धारित सीमा से अधिक कोयले का खनन किया। इससे राज्य सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ। इसके साथ ही खनन गतिविधियों के कारण स्थानीय ग्रामीणों और आदिवासी परिवारों का बड़े पैमाने पर विस्थापन हुआ, लेकिन उनके पुनर्वास और मुआवजे की समुचित व्यवस्था नहीं की गई।

इस मामले में झारखंड उच्च न्यायालय के अधिवक्ता राम सुभग सिंह ने जनहित याचिका दायर की है। याचिका में सीबीआई से निष्पक्ष जांच कराने, अवैध खनन में शामिल कंपनियों और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने तथा विस्थापित परिवारों के पुनर्वास की ठोस योजना लागू करने की मांग की गई है। अदालत की सख्ती के बाद इस मामले को लेकर राज्य में राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है।

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