World News: फिलिस्तीन को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता देने के मामले में जापान का रवैया लगातार बदल रहा है। हाल ही में आई रिपोर्ट्स के अनुसार जापान ने फिलहाल फ़िलिस्तीनी राज्य को मान्यता न देने का फैसला किया है। माना जा रहा है कि यह कदम अमेरिका के साथ अपने संबंधों को बनाए रखने और इजरायल के कड़े रुख से बचने के लिए उठाया गया है।

पिछले हफ्ते ही संयुक्त राष्ट्र की बैठक में जापान उन 142 देशों में शामिल था, जिन्होंने द्वि-राज्य समाधान (टू-स्टेट सॉल्यूशन) की दिशा में ठोस और समयबद्ध कदम उठाने वाले एक प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया था। लेकिन अब कुछ ही दिनों में उसका रुख बदल गया है।

सरकारी सूत्रों का कहना है कि जापान फ़िलिस्तीन को मान्यता देने से पहले व्यापक समीक्षा करना चाहता है। जापान के विदेश मंत्री ताकेशी इवाया ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि उनकी सरकार इस मामले का “उचित समय और तौर-तरीकों सहित, गहन मूल्यांकन” कर रही है।

दूसरी ओर, सात देशों के समूह (G7) में शामिल जर्मनी और इटली पहले ही कह चुके हैं कि फिलिस्तीन को तत्काल मान्यता देना ठीक नहीं होगा। वहीं, ब्रिटेन, फ्रांस, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया ने संकेत दिया है कि वे इस महीने होने वाली यूएन महासभा में फिलिस्तीन को एक राष्ट्र का दर्जा देने का समर्थन करेंगे।

भारत पहले ही फिलिस्तीन को राष्ट्र का दर्जा दे चुका है और मौजूदा संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव का समर्थन भी किया है। इससे इजरायल पर अंतरराष्ट्रीय दबाव और बढ़ गया है।

रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अमेरिका ने कई कूटनीतिक माध्यमों से जापान को फिलिस्तीन की मान्यता न देने के लिए समझाने की कोशिश की थी। वहीं, फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट ने जापानी विदेश मंत्री से मिलकर इसे मान्यता देने का आग्रह किया था।

इस बीच, जापानी प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा ने भी 22 सितंबर को न्यूयॉर्क में होने वाली उस बैठक में शामिल न होने का फैसला किया है, जिसमें इजरायल और फिलिस्तीन के बीच द्वि-राज्य समाधान पर चर्चा होनी है। यह कदम जापान की सावधानी और दबाव की स्थिति को और स्पष्ट कर देता है।

जापान का यह बदलता रुख अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक अहम संकेत माना जा रहा है। एक तरफ वह यूएन में समाधान के पक्ष में वोट देता है, तो दूसरी ओर अमेरिका और इजरायल के दबाव में ठोस मान्यता देने से पीछे हट जाता है।

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