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जमशेदपुर-कलिंगानगर संयंत्रों का कमाल, टाटा स्टील की पहली तिमाही में रिकॉर्ड उत्पादन

Jamshedpur news: टाटा स्टील ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2026) के अस्थायी उत्पादन और बिक्री के आंकड़े जारी करते हुए मजबूत कारोबारी प्रदर्शन की जानकारी दी है। कंपनी के अनुसार पहली तिमाही में भारत में क्रूड स्टील का उत्पादन 5.82 मिलियन टन

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Jamshedpur news: टाटा स्टील ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2026) के अस्थायी उत्पादन और बिक्री के आंकड़े जारी करते हुए मजबूत कारोबारी प्रदर्शन की जानकारी दी है। कंपनी के अनुसार पहली तिमाही में भारत में क्रूड स्टील का उत्पादन 5.82 मिलियन टन रहा, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि की तुलना में 11 प्रतिशत अधिक है। वहीं कुल डिलीवरी 5.17 मिलियन टन दर्ज की गई। कंपनी ने बताया कि उत्पादन और बिक्री में यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से जमशेदपुर और कलिंगानगर स्टील प्लांट में क्षमता के बेहतर उपयोग, उच्च उत्पादन तथा घरेलू बाजार में मजबूत मांग के कारण संभव हुई।

टाटा स्टील ने कहा कि घरेलू डिलीवरी में भी 11 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज की गई है। बेहतर उत्पाद मिश्रण, मजबूत वितरण नेटवर्क और विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों से लगातार मिल रही मांग ने इस प्रदर्शन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कंपनी का कहना है कि उसने उच्च गुणवत्ता वाले वैल्यू एडेड स्टील उत्पादों की हिस्सेदारी बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया है, जिससे मुनाफे की संभावनाएं भी मजबूत हुई हैं।

ऑटोमोटिव एवं स्पेशल प्रोडक्ट्स कारोबार ने पहली तिमाही में लगभग 0.9 मिलियन टन की बिक्री के साथ अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। कलिंगानगर संयंत्र में कंटीन्यूअस एनीलिंग और गैल्वेनाइजिंग लाइनों की क्षमता बढ़ने से हाई-एंड ऑटोमोटिव स्टील उत्पादों की बिक्री में 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इससे ऑटोमोबाइल क्षेत्र में कंपनी की अग्रणी स्थिति और मजबूत हुई है।

ब्रांडेड प्रोडक्ट्स एवं रिटेल कारोबार ने भी पहली तिमाही में रिकॉर्ड प्रदर्शन किया। इस खंड में लगभग 1.7 मिलियन टन की बिक्री हुई। निर्माण क्षेत्र में उपयोग होने वाले कंपनी के प्रमुख ब्रांड टाटा टिस्कॉन की बिक्री में 33 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि कोल्ड रोल्ड स्टील ब्रांड टाटा स्टीलियम की बिक्री 41 प्रतिशत बढ़ी। कंपनी ने इसे देशभर में मजबूत ब्रांड पहचान और वितरण नेटवर्क का परिणाम बताया।

इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स एवं प्रोजेक्ट्स कारोबार ने भी लगभग 1.6 मिलियन टन की बिक्री दर्ज की। कंपनी जहाज निर्माण, कंटेनर निर्माण, डेटा सेंटर, इंजीनियरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे तेजी से उभरते क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति लगातार बढ़ा रही है। नए ग्राहकों को जोड़ने, नए स्टील ग्रेड विकसित करने और विभिन्न उद्योगों से अनुमोदन प्राप्त करने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

टाटा स्टील के डाउनस्ट्रीम कारोबार में भी सकारात्मक प्रदर्शन देखने को मिला। ट्यूब्स, टिनप्लेट, वायर्स और कलर कोटेड स्टील उत्पादों की मांग में वृद्धि हुई। इनमें ट्यूब्स और टिनप्लेट कारोबार ने पहली तिमाही में अब तक का सर्वश्रेष्ठ बिक्री रिकॉर्ड बनाया। कंपनी के डिजिटल प्लेटफॉर्म टाटा स्टील आशियाना और डिजीईसीए का प्रदर्शन भी उल्लेखनीय रहा। इन दोनों ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से पहली तिमाही में 2,200 करोड़ रुपये का सकल व्यापार मूल्य (जीएमवी) दर्ज किया गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 61 प्रतिशत अधिक है।

यूरोपीय परिचालन की बात करें तो टाटा स्टील नीदरलैंड्स में पहली तिमाही के दौरान 1.55 मिलियन टन लिक्विड स्टील का उत्पादन हुआ, जबकि डिलीवरी 1.40 मिलियन टन रही। अप्रैल 2026 में डायरेक्ट शीट प्लांट के अस्थायी रूप से बंद रहने के कारण उत्पादन और आपूर्ति प्रभावित हुई। हालांकि स्थानीय पर्यावरण प्राधिकरण ने परीक्षण संचालन की अनुमति दे दी है और पूर्ण उत्पादन बहाल करने की प्रक्रिया जारी है।

टाटा स्टील यूके ने पहली तिमाही में 0.48 मिलियन टन स्टील की आपूर्ति की। कंपनी वर्तमान में खरीदे गए सब्सट्रेट की डाउनस्ट्रीम प्रोसेसिंग के माध्यम से ग्राहकों की जरूरतें पूरी कर रही है। साथ ही वेल्स के पोर्ट टैलबोट में लगभग 30 लाख टन वार्षिक क्षमता वाले अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस की स्थापना का कार्य भी तेजी से आगे बढ़ रहा है, जो भविष्य में कम कार्बन उत्सर्जन वाली इस्पात उत्पादन प्रणाली का आधार बनेगा।

टाटा स्टील थाईलैंड में पहली तिमाही के दौरान 0.33 मिलियन टन बिक्री योग्य स्टील का उत्पादन हुआ और इतनी ही मात्रा में ग्राहकों को आपूर्ति की गई।

कंपनी ने कहा कि वह उत्पादन क्षमता विस्तार, डिजिटल तकनीक, उच्च मूल्य वाले उत्पादों और टिकाऊ इस्पात निर्माण पर लगातार निवेश कर रही है। टाटा स्टील का लक्ष्य वर्ष 2045 तक नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन हासिल करना है। वर्तमान में कंपनी की वैश्विक कच्चे इस्पात उत्पादन क्षमता 36 मिलियन टन प्रतिवर्ष है और उसके परिचालन एशिया, यूरोप तथा अन्य महाद्वीपों तक फैले हुए हैं।

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