Jamshedpur News: महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का नाम बदलने की कथित सुगबुगाहट ने झारखंड की राजनीति में उबाल ला दिया है। शनिवार को झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने पूर्वी सिंहभूम जिला मुख्यालय (डीसी ऑफिस) के बाहर एक दिवसीय विशाल धरना-प्रदर्शन कर केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। झामुमो नेताओं ने दोटूक शब्दों में कहा कि मनरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत और गरीबों की ‘जीवनरेखा’ है। इसके नाम के साथ छेड़छाड़ करना करोड़ों मजदूरों की भावनाओं और उनके अधिकारों पर सीधा हमला है।
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गौरतलब है कि मनरेगा के मुद्दे पर इंडिया (I.N.D.I.A.) गठबंधन पूरी तरह लामबंद दिख रहा है। झामुमो से पहले कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी आमबागान से डीसी ऑफिस तक मार्च निकालकर अपना विरोध दर्ज कराया था। शनिवार के धरने में मोहन कर्मकार, प्रमोद लाल और अन्य वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि यदि केंद्र अपने फैसले पर अड़ी रही, तो झारखंड के हर गांव से दिल्ली तक उग्र आंदोलन छेड़ा जाएगा।
धरने में पूर्व सांसद सुमन महतो, राजू गिरी, सुनील महतो, सागेन पूर्ति, नगर संयोजक बागराई मार्डी और नीता सरकार सहित सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे। नेताओं ने एक सुर में कहा कि केंद्र सरकार को नाम बदलने के बजाय योजना के बजट और मजदूरों की मजदूरी बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए। प्रदर्शन के अंत में एक मांग पत्र भी सौंपा गया, जिसमें नाम बदलने की किसी भी योजना को तुरंत रोकने की मांग की गई।



