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हाई कोर्ट के आदेश पर जमशेदपुर में चला बुलडोजर, 24 अवैध इमारतों पर कार्रवाई

Jamshedpur: झारखंड हाई कोर्ट के सख्त निर्देश के बाद जमशेदपुर शहर में अवैध निर्माण और नक्शा विचलन के खिलाफ प्रशासन ने निर्णायक कदम उठाना शुरू कर दिया है। सोमवार सुबह करीब 11 बजे से जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (जेएनएसी) की दो टीमें शहर के प्रमुख

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Jamshedpur: झारखंड हाई कोर्ट के सख्त निर्देश के बाद जमशेदपुर शहर में अवैध निर्माण और नक्शा विचलन के खिलाफ प्रशासन ने निर्णायक कदम उठाना शुरू कर दिया है। सोमवार सुबह करीब 11 बजे से जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (जेएनएसी) की दो टीमें शहर के प्रमुख व्यावसायिक इलाकों में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में जुट गईं। इस अभियान के तहत बिष्टुपुर और साकची क्षेत्रों में चिन्हित 24 इमारतों पर कार्रवाई की जा रही है।

बिष्टुपुर में एक टीम ने निरीक्षण और ध्वस्तीकरण का काम संभाला, जबकि दूसरी टीम साकची-बिष्टुपुर इलाके में रामाडा होटल के बगल स्थित एक पांच मंजिला इमारत पर पहुंची, जहां गंभीर नक्शा विचलन पाया गया। जेएनएसी से इस भवन का जी प्लस थ्री का नक्शा स्वीकृत था, लेकिन मौके पर पांच मंजिलों का निर्माण कर दिया गया था। हाई कोर्ट के आदेश के अनुपालन में अतिरिक्त दो मंजिलों को तोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस दौरान जेएनएसी के उपनगर आयुक्त कृष्ण कुमार स्वयं मौके पर मौजूद रहे और किसी भी संभावित विरोध को देखते हुए भारी पुलिस बल की तैनाती की गई थी।

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इसके साथ ही साकची के बाराद्वारी क्षेत्र समेत अन्य इलाकों में भी चिन्हित इमारतों पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है। बाराद्वारी की एक इमारत में नक्शा विचलन हटाने का कार्य चल रहा है। उपनगर आयुक्त कृष्ण कुमार ने बताया कि इन 24 इमारतों में कहीं अतिरिक्त फ्लोर का निर्माण किया गया है तो कहीं स्वीकृत नक्शे के अनुरूप निर्माण नहीं हुआ है। कई इमारतों में बेसमेंट को पार्किंग के रूप में दर्शाया गया था, लेकिन वहां दुकानें बनाकर व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा है, जो नियमों का उल्लंघन है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पूरी कार्रवाई हाई कोर्ट में दायर रिट याचिका के बाद पारित आदेश के तहत की जा रही है। सभी संबंधित भवन मालिकों को पूर्व में तीन-तीन नोटिस जारी किए जा चुके थे। कुछ भवन मालिकों का दावा है कि उन्होंने नक्शा विचलन को नियमित कराने के लिए जुर्माना जमा किया था, लेकिन जेएनएसी का कहना है कि बिना आवेदन और तकनीकी जांच के जमा की गई राशि को नियमितीकरण नहीं माना जा सकता।

प्रशासन ने साफ संकेत दिया है कि लौहनगरी में अवैध निर्माण और नियमों की अनदेखी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी और हाई कोर्ट के आदेश के तहत आगे भी सख्त कार्रवाई जारी

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