Jamshedpur: लौहनगरी की जिला अतिरिक्त एवं सत्र न्यायाधीश (तृतीय) निति कुमारी की अदालत ने ₹30 लाख के गबन और धोखाधड़ी के आरोपी सुषमा पांडे और रंजीत कुमार (निवासी: मुजफ्फरपुर, बिहार) की अग्रिम जमानत याचिका नामंजूर कर दी है। हालांकि, इसी मामले के दो अन्य आरोपियों, निशांत कुमार और आयुष कुमार की जमानत अर्जी कुछ शर्तों के साथ मंजूर कर ली गई है।

क्या है पूरा मामला?

सोनारी निवासी ‘केयर ट्रेडर्स’ के मालिक संजय कुमार ने साकची थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, आरोपी आयुष और शत्रुंजय सिंह ने संजय से मिलकर उन्हें रंजीत कुमार और सुषमा पांडे से मिलवाया था। आरोपियों ने झांसा दिया कि मंगलौर (MRPL) में ₹50 लाख का फायर सेफ्टी वर्क और ₹2 करोड़ का स्क्रैप शिफ्टिंग का काम है, जिसमें भारी मुनाफा होगा।

धोखाधड़ी का ऐसे खुला राज

नवंबर 2023 में वर्क ऑर्डर मिलने के बाद संजय कुमार ने काम शुरू किया। आरोप है कि 6 महीने बाद आरोपियों ने रॉयल्टी दर बढ़ा दी और जीएसटी (GST) व टीडीएस (TDS) का पैसा भी अपने पास रख लिया। काम पूरा होने के बाद संजय का ₹30,87,586 बकाया रह गया। जब उन्होंने पैसे मांगे और कानूनी नोटिस भेजा, तो आरोपी फर्जी रसीदें लेकर उनके दफ्तर पहुंच गए। उन रसीदों पर संजय कुमार के फर्जी हस्ताक्षर बने हुए थे, जिसमें यह दिखाया गया था कि उन्होंने अपनी बकाया राशि प्राप्त कर ली है।

अदालत का फैसला

कोर्ट ने मामले की गंभीरता और फर्जीवाड़े के साक्ष्यों को देखते हुए मुख्य आरोपी सुषमा और रंजीत को राहत देने से इनकार कर दिया। वहीं, निशांत और आयुष को तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर कर जमानत आदेश लेने और जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया गया है। अदालत में सूचक की ओर से अधिवक्ता सुधीर कुमार पप्पू, पूर्व लोक अभियोजक सुशील कुमार जायसवाल और बबीता जैन ने दलीलें पेश कीं।

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