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Home»World»ईरान-अमेरिका से वैश्विक बाजार से गायब हुआ 115 करोड़ बैरल तेल, बढ़ी चिंता
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ईरान-अमेरिका से वैश्विक बाजार से गायब हुआ 115 करोड़ बैरल तेल, बढ़ी चिंता

अमेरिका और ईरान के बीच चले युद्ध के कारण वैश्विक बाजार से 115 करोड़ बैरल कच्चे तेल की सप्लाई ठप रही, जिससे अमेरिका का इमरजेंसी रिजर्व 43 साल के निचले स्तर पर पहुंच गया है।
By Samsul HaqueJune 22, 20264 Mins Read
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Washington, (USA): ईरान और अमेरिका के बीच हुए ऐतिहासिक समझौते के बाद रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को व्यापार के लिए फिर से खोल दिया गया है। इसके बावजूद, दुनिया अभी भी बड़े तेल संकट से जूझ रही है। हाल ही में सामने आई एक वैश्विक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले करीब चार महीनों से चले इस युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार से 115 करोड़ बैरल कच्चे तेल की भारी-भरकम सप्लाई पूरी तरह गायब हो चुकी है।

Read more: महायुद्ध की आग में झुलसा तेल बाजार, ब्रेंट क्रूड पहुंचा $93 के पार!

तेल उद्योग के जानकारों का मानना है कि इस वैश्विक कमी का असर आने वाले कई महीनों तक बाजार पर साफ बना रह सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध के दौरान मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) से होने वाली तेल की सप्लाई लगभग पूरी तरह बंद रही, जिसके चलते दुनिया के तमाम देशों के स्ट्रेटजिक (रणनीतिक) और कॉमर्शियल (व्यावसायिक) ऑयल रिजर्व तेजी से घटे हैं। अकेले पिछले कुछ महीनों के भीतर ही दुनिया भर के स्टॉक से 19 करोड़ बैरल तेल निकाला जा चुका है।

43 साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंचा अमेरिकी रिजर्व

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) का स्ट्रेटजिक रिजर्व साल 1990 के बाद से अपने सबसे न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है। वहीं, दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका का इमरजेंसी ऑयल रिजर्व भी पिछले 43 सालों के सबसे निचले स्तर पर आ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार को वर्साय में आयोजित जी7 (G7) बैठक के दौरान इस गंभीर स्थिति को स्वीकार किया।

Read more: ‘समय बर्बाद कर रहा था ईरान, बातचीत बंद हो तो हो’; ट्रंप के तेवरों से हिला तेल बाजार!

ट्रंप ने बेहद स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर समय रहते यह जंग खत्म नहीं की जाती, तो हमारे पास मौजूद तेल का इमरजेंसी रिजर्व अगले करीब चार हफ्तों में पूरी तरह खत्म हो जाता। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी और अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) के संयुक्त आंकड़ों के मुताबिक, इस समय पूरी दुनिया में औसतन 10.3 करोड़ बैरल कच्चे तेल का उत्पादन प्रतिदिन हो रहा है। इस लिहाज से हर महीने करीब 309 करोड़ बैरल और सालभर में करीब 3,760 करोड़ बैरल तेल पैदा होता है।

दुनिया की तेल सप्लाई का गणित

आपको बता दें कि अमेरिका वर्तमान में दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है और अकेले वैश्विक बाजार के करीब 13 फीसदी कच्चे तेल का उत्पादन करता है। अमेरिका के बाद इस सूची में क्रमशः सऊदी अरब, रूस, कनाडा और इराक का नंबर आता है। ये पांचों बड़े देश मिलकर दुनिया की कुल तेल सप्लाई का करीब 40 फीसदी हिस्सा संभालते हैं। यही वजह है कि इन शीर्ष देशों में किसी भी तरह का युद्ध, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध या उत्पादन में मामूली कमी भी सीधे तौर पर वैश्विक बाजार और आम जनता के पेट्रोल-डीजल की कीमतों को बुरी तरह प्रभावित करती है।

ब्रेंट क्रूड के दाम गिरे, पर सप्लाई सामान्य होने में लगेगा वक्त

अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की खबर आते ही अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार ने बड़ी राहत की सांस ली है। युद्ध के चरम काल के दौरान जो ब्रेंट क्रूड 126 डॉलर प्रति बैरल के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया था, वह अब तेजी से गिरकर 80 डॉलर प्रति बैरल से भी नीचे आ गया है। हालांकि, विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि कीमतों में आई यह गिरावट पूरी कहानी नहीं बयां करती।

Read more: सेंट पीटर्सबर्ग बंदरगाह पर यूक्रेनी ड्रोन का बड़ा हमला, तेल टर्मिनल में लगी भीषण आग!

वैश्विक रिपोर्ट के मुताबिक, होर्मुज के रास्ते को दोबारा खोलने की घोषणा के बाद भी कच्चे तेल की वास्तविक सप्लाई तुरंत सामान्य नहीं होने वाली है। इसके लिए सबसे पहले समुद्री व्यापारिक रास्तों से बिछाई गई बारूदी सुरंगों को पूरी तरह हटाना होगा। इसके बाद समुद्र में फंसे खाली टैंकरों की सुरक्षित वापसी, तेल उत्पादन को पुराने स्तर पर लाने और पूरी ग्लोबल सप्लाई चेन को फिर से पटरी पर दौड़ाने में लंबा वक्त लगेगा। वैश्विक तेल उद्योग से जुड़े दिग्गजों का मानना है कि इस पूरी व्यवस्था को पूरी तरह सामान्य होने में अभी कई महीने लग सकते हैं, तब तक दुनिया के देशों को अपने मौजूदा सीमित तेल भंडार के सहारे ही काम चलाना होगा।

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