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ऑपरेशन नवजीवन-III का असर? 10 लाख के इनामी समेत 4 नक्सलियों ने डाले हथियार

ऑपरेशन नवजीवन-III के तहत चाईबासा और सरायकेला में 10 लाख के इनामी जोनल कमेटी सदस्य समेत चार नक्सलियों ने हथियारों के साथ आत्मसमर्पण किया।
ऑपरेशन नवजीवन-III का असर? नक्सली सरेंडर

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Chaibasa/Saraikela: कोल्हान, पोड़ाहाट और सारंडा क्षेत्र में नक्सलवाद के खिलाफ चलाए जा रहे संयुक्त अभियान के बीच सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। मंगलवार को ऑपरेशन नवजीवन-III के तहत प्रतिबंधित भाकपा माओवादी संगठन के चार सक्रिय सदस्यों ने पुलिस एवं केंद्रीय सुरक्षा बलों के समक्ष हथियारों के साथ आत्मसमर्पण किया। आत्मसमर्पण करने वालों में 10 लाख रुपये का इनामी जोनल कमेटी सदस्य सलुका कायम उर्फ भुवनेश्वर उर्फ डांगिल भी शामिल है।

एके-47, इंसास राइफल, वायरलेस सेट, मैगजीन और 2,200 से अधिक जिंदा कारतूस बरामद, अधिकारियों ने कहा—हिंसा छोड़ मुख्यधारा में लौटें बचे नक्सली

आत्मसमर्पण करने वाले अन्य नक्सलियों में एक लाख रुपये की इनामी दस्ता सदस्य कोदोमुनी कोड़ा उर्फ कोदम मुनी, दस्ता सदस्य पिंकी पूर्ति उर्फ सकाती पूर्ति तथा अनिता तामसोय उर्फ अनिता कायम उर्फ मुक्ता शामिल हैं। सलुका कायम, कोदोमुनी कोड़ा और पिंकी पूर्ति ने चाईबासा पुलिस के समक्ष, जबकि अनिता तामसोय ने सरायकेला-खरसावां पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया।

हथियारों का बड़ा जखीरा बरामद

आत्मसमर्पण के दौरान चारों नक्सलियों के पास से एके-47 राइफल, इंसास राइफल, वायरलेस सेट, मैगजीन और 2,200 से अधिक जिंदा कारतूस बरामद किए गए।  पुलिस के अनुसार 10 लाख रुपये का इनामी सलुका कायम भाकपा माओवादी संगठन के जोनल कमेटी सदस्य के रूप में सक्रिय था। उसके खिलाफ पश्चिमी सिंहभूम जिले में 90 और सरायकेला-खरसावां जिले में छह मामले दर्ज हैं। इस तरह उसके खिलाफ कुल 96 मामले दर्ज हैं। आत्मसमर्पण के समय उसके पास से एक एके-47 राइफल, दो मैगजीन और 843 कारतूस समेत अन्य सामग्री बरामद की गई।

एक लाख रुपये की इनामी दस्ता सदस्य कोदोमुनी कोड़ा के खिलाफ चाईबासा जिले में सात मामले दर्ज हैं। उसके पास से एक वायरलेस सेट और 697 कारतूस बरामद हुए। पिंकी पूर्ति के खिलाफ चाईबासा में 13 मामले दर्ज हैं। उसके पास से एक वायरलेस सेट और 639 कारतूस बरामद किए गए। वहीं सरायकेला-खरसावां पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण करने वाली अनिता तामसोय के खिलाफ पश्चिमी सिंहभूम में 12 और सरायकेला-खरसावां में एक मामला दर्ज है। उसके पास से एक इंसास राइफल, पांच मैगजीन और 97 कारतूस समेत अन्य सामग्री बरामद की गई।

पुलिस के अनुसार चारों आत्मसमर्पित नक्सलियों के खिलाफ पश्चिमी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां जिले में कुल 129 मामले दर्ज हैं। सुरक्षा बलों के लिए यह सफलता इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि आत्मसमर्पण करने वालों में संगठन का 10 लाख रुपये का इनामी जोनल कमेटी सदस्य भी शामिल है।

कोल्हान डीआईजी ने बताया महत्वपूर्ण उपलब्धि

इस मौके पर कोल्हान के पुलिस उपमहानिरीक्षक अनुरंजन किस्टोफा ने आत्मसमर्पण को कोल्हान के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने नक्सल विरोधी अभियानों के दौरान शहीद हुए पुलिसकर्मियों और केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवानों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों से पुलिस, केंद्रीय सुरक्षा बल और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियां मिलकर नक्सलवाद के खिलाफ अभियान चला रही हैं। लगातार चलाए जा रहे अभियानों के परिणामस्वरूप माओवादी संगठन कमजोर हुआ है और उसके कई बड़े कमांडर गिरफ्तार किए जा चुके हैं या मुठभेड़ों में मारे गए हैं।

डीआईजी ने बचे हुए नक्सलियों से सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति का लाभ उठाकर मुख्यधारा में लौटने की अपील की। उन्होंने कहा कि हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज में सम्मानजनक जीवन शुरू करने का यह बेहतर अवसर है। उन्होंने सुरक्षा बलों को आगे की चुनौतियों को लेकर सतर्क रहने के साथ-साथ ग्रामीणों और आम लोगों के साथ बेहतर संवाद कायम करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद की वापसी रोकने के लिए सुरक्षा अभियान के साथ जनता का विश्वास जीतना भी जरूरी है।

सीआरपीएफ डीआईजी ने शहीद जवानों को किया नमन

सीआरपीएफ के चाईबासा डीआईजी ने भी आत्मसमर्पण को नक्सल विरोधी अभियान की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कोल्हान में पिछले करीब तीन दशक से चले नक्सल विरोधी अभियानों में शहीद हुए जवानों और अधिकारियों को नमन किया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों के अधिकारियों और जवानों ने अपनी जान की बाजी लगाकर क्षेत्र में नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ी है। सारंडा और कोल्हान के जंगलों में सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई से अब परिस्थितियां काफी बदली हैं।

उन्होंने कहा कि सुरक्षा का वातावरण बनने के बाद अब कोल्हान के विकास पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और अन्य बुनियादी सुविधाओं को ग्रामीण इलाकों तक पहुंचाना जरूरी है। उन्होंने क्षेत्र के लोगों से विकास की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी की अपील की।

सरायकेला एसपी बोले—जिले में अब गिने-चुने नक्सली बचे

सरायकेला-खरसावां के पुलिस अधीक्षक मनोज स्वर्गियारी ने कहा कि नक्सली संगठन की गतिविधियां अब काफी सीमित रह गई हैं। उन्होंने बताया कि जमशेदपुर और सरायकेला-खरसावां क्षेत्र में अब करीब पांच से छह नक्सलियों के बचे होने की जानकारी है। एसपी ने बचे हुए नक्सलियों से हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने की अपील की। उन्होंने कहा कि आत्मसमर्पण कर पुनर्वास नीति का लाभ उठाने वालों को समाज में सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिलेगा। वहीं हिंसा का रास्ता जारी रखने वालों के खिलाफ सुरक्षा बल कार्रवाई करने को मजबूर होंगे।

असीम मंडल के दस्ते पर सुरक्षा बलों की नजर

कोल्हान डीआईजी ने बताया कि क्षेत्र में अब मुख्य चुनौती बचे हुए छोटे नक्सली दस्तों से है। असीम मंडल का दस्ता सुरक्षा बलों के निशाने पर है। उसकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है और गिरफ्तारी के लिए अभियान जारी है। उन्होंने असीम मंडल समेत बचे हुए माओवादी सदस्यों से भी हथियार छोड़कर आत्मसमर्पण करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार की पुनर्वास नीति के तहत मुख्यधारा में लौटने वालों को नया जीवन शुरू करने का अवसर दिया जा रहा है।

ऑपरेशन नवजीवन से लगातार कमजोर हो रहा माओवादी संगठन

पुलिस के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में चाईबासा पुलिस के समक्ष भाकपा माओवादी संगठन के 10 सदस्यों ने आत्मसमर्पण किया था।
इसके बाद 21 मई 2026 को ऑपरेशन नवजीवन-I के तहत कुल 27 नक्सली कमांडर और दस्ता सदस्यों ने आत्मसमर्पण किया। इनके पास से 16 हथियार और 3,082 गोलियां बरामद की गई थीं। वहीं 28 जुलाई 2026 को ऑपरेशन नवजीवन-II के तहत 14 नक्सली कमांडर और दस्ता सदस्यों ने आत्मसमर्पण किया। इनके पास से 10 हथियार और 1,412 गोलियां बरामद की गई थीं।

अब 11 अगस्त 2026 को ऑपरेशन नवजीवन-III के तहत चार सक्रिय नक्सलियों के आत्मसमर्पण ने सुरक्षा बलों के अभियान को एक और बड़ी सफलता दी है। पुलिस के अनुसार वर्ष 2025-26 में जुलाई तक पश्चिमी सिंहभूम जिले में 49 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण, 22 नक्सली पुलिस मुठभेड़ में मारे गए और 60 नक्सलियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया।

तीन दशक के नक्सलवाद के बाद विकास की नई उम्मीद

कोल्हान क्षेत्र करीब तीन दशक तक नक्सलवाद की हिंसा का सामना करता रहा है। सारंडा, पोड़ाहाट और कोल्हान के घने जंगल लंबे समय तक माओवादी गतिविधियों के प्रमुख केंद्र रहे। इस दौरान पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के कई जवानों और अधिकारियों ने अपनी शहादत दी। अब लगातार गिरफ्तारियों, मुठभेड़ों और आत्मसमर्पण के कारण माओवादी संगठन की पकड़ कमजोर हुई है। सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि नक्सलवाद के कमजोर होने के बाद क्षेत्र में विकास की नई संभावनाएं पैदा हुई हैं।

अधिकारियों का कहना है कि केवल सुरक्षा अभियान से नक्सलवाद का स्थायी समाधान संभव नहीं है। ग्रामीणों के साथ बेहतर संवाद, विकास योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन, रोजगार के अवसर तथा सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार भी उतना ही जरूरी है।
मंगलवार का आत्मसमर्पण बदलते कोल्हान की तस्वीर पेश करता है। एक ओर कभी संगठन में प्रभावशाली भूमिका निभाने वाले नक्सली हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौट रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सुरक्षा बल बचे हुए माओवादी दस्तों के खिलाफ अभियान जारी रखे हुए हैं।

अधिकारियों का संदेश स्पष्ट है—हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने वालों के लिए दरवाजे खुले हैं, लेकिन हिंसा का रास्ता चुनने वालों के खिलाफ सुरक्षा अभियान जारी रहेगा।

रिपोर्ट- के दुर्गा राव

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Samsul Haque

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