Giridih: झारखंड के गिरिडीह जिले को शर्मसार करने वाली 25 जनवरी की उस काली रात का सच अब दुनिया के सामने आ गया है। दो नाबालिग आदिवासी बच्चियों के साथ हुई सामूहिक दरिंदगी कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि बदले की आग में रची गई एक सोची-समझी साजिश थी। गिरिडीह पुलिस ने इस ‘ब्लाइंड केस’ की परतों को खोलते हुए न सिर्फ आरोपियों को दबोचा है, बल्कि उस कड़वी रंजिश का भी खुलासा किया है जिसने इंसान को हैवान बना दिया।

एक ‘इंकार’ और हैवानियत की हदें

पुलिस अधीक्षक (SP) डॉ. बिमल कुमार ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि इस घिनौनी वारदात के पीछे ‘टूटे रिश्ते’ और ‘अपमान’ की कहानी छिपी थी। दरअसल, मेला के दौरान एक पीड़िता की मुलाकात उसके पूर्व परिचित युवक से हुई थी। जब पीड़िता ने उसे पहचानने से इनकार कर दिया, तो उस युवक के अहम को गहरी चोट पहुँची। इसी नाराजगी और बदले की भावना में जलकर उसने अपने अन्य साथियों और किशोरों को उकसाया और योजनाबद्ध तरीके से इस सामूहिक दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिलवाया।

अंधेरे में गुम थी पहचान, तकनीक ने दिखाया रास्ता

घटना के बाद पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती आरोपियों की पहचान थी। रात के अंधेरे के कारण पीड़िताओं ने किसी को पहचाना नहीं था। एसपी के निर्देश पर डुमरी एसडीपीओ सुमित कुमार के नेतृत्व में बनी एसआईटी (SIT) ने दिन-रात एक कर दिया। तकनीकी शाखा और महिला पुलिसकर्मियों की संवेदनशीलता के कारण जांच की सुई उस ‘पूर्व परिचित’ तक पहुँची, जो खुद एक किशोर निकला। जब कड़ी पूछताछ हुई, तो उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया।

कानून का शिकंजा: 4 गिरफ्तार, 4 किशोर निरुद्ध

पुलिस ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए हरलाडीह निवासी राजेश मुर्मू, रविलाल टुडू और धनबाद के संजय व सोहन टुडू को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, साजिश में शामिल चार अन्य किशोरों को बाल संरक्षण कानून के तहत निरुद्ध किया गया है। पुलिस अब एक फरार आरोपी की तलाश में जुटी है। एसपी डॉ. बिमल कुमार ने टीम की पीठ थपथपाते हुए कहा कि यह मामला पुलिस के लिए एक परीक्षा थी, जिसे टीमवर्क और तकनीक के मेल से सुलझा लिया गया है। इस खुलासे ने समाज को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर छोटी-छोटी बातें और आपसी रंजिश किस कदर अपराध के दलदल में धकेल रही हैं।

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