World News: काहिरा में सोमवार को मिस्र और ब्रिटेन के बीच हुई उच्चस्तरीय बातचीत ने गाजा में शांति की कोशिशों को नई दिशा दी है। मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल-फतह अल-सीसी और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर के बीच हुई फोन वार्ता में दोनों नेताओं ने यह साफ कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के हालिया प्रस्ताव पर तुरंत आगे बढ़ना ही हालात सुधारने का रास्ता है।

मिस्र और ब्रिटेन की बातचीत से उम्मीदें बढ़ीं

मिस्र के राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से जारी बयान में जोर दिया गया कि युद्धविराम को टिकाऊ बनाना अभी की सबसे बड़ी ज़रूरत है। दोनों देशों ने माना कि अगर अंतरराष्ट्रीय समुदाय तेज़ी से कदम उठाए, तो गाजा में तनाव कम किया जा सकता है और बुनियादी जरूरतों को बेहतर ढंग से पूरा किया जा सकेगा।

UN प्रस्ताव में अंतरराष्ट्रीय बल की भूमिका साफ

इसी बीच, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने अमेरिका द्वारा तैयार प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसमें गाजा के पुनर्निर्माण और सुरक्षा के लिए एक अस्थायी अंतरराष्ट्रीय बल यानी आईएसएफ बनाने की अनुमति दी गई है। यह बल सदस्य देशों के कर्मचारियों के साथ काम करेगा और इसकी हर गतिविधि मिस्र और इजरायल के साथ समन्वय में होगी। यह फैसला गाजा के लिए एक संरचित और संगठित सहायता प्रणाली तैयार करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

अरब लीग ने कहा—यह शुरुआत है, अभी और मेहनत चाहिए

सिसी और स्टारमर ने अपनी बातचीत में अक्टूबर में मिस्र में हुई शर्म अल-शेख बैठक का भी जिक्र किया। दोनों नेताओं का मानना है कि वहां तय किए गए मानवीय सहायता के दिशा-निर्देशों पर तेजी से काम शुरू होना चाहिए, ताकि जरूरतमंद लोगों तक राहत जल्द पहुंच सके और पुनर्निर्माण की प्रक्रिया तेज हो सके। स्टारमर ने विशेष तौर पर कहा कि गाजा के लोगों तक पर्याप्त सहायता पहुंचाना अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नैतिक जिम्मेदारी है।

दूसरी ओर, अरब लीग के महासचिव अहमद अबुल-ग़ैत ने भी संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव का स्वागत किया, लेकिन साथ ही यह भी जोड़ दिया कि यह “रास्ते की शुरुआत है, मंज़िल नहीं।” उनके मुताबिक, प्रस्ताव को जमीन पर लागू करना ही वह कदम होगा, जिससे फिलिस्तीनियों के जीवन में असली बदलाव नजर आएगा। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव भविष्य में एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राष्ट्र की दिशा में बढ़ने वाला कदम भी है।

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