India News: अहमदाबाद सिटी क्राइम ब्रांच ने स्पर्म व्हेल की उल्टी यानी एम्बरग्रीस के साथ चार लोगों को गिरफ्तार किया है। इस दुर्लभ और बहुमूल्य पदार्थ की मात्रा 2.904 किलोग्राम है, जिसकी अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कीमत 2.90 करोड़ रुपए है। कचरा बीनते समय हनीफ को यह उल्टी मिली थी। भारत के वन्यजीव संरक्षण के तहत शुक्राणु व्हेल को संरक्षित प्रजाति के रूप में सूचीबद्ध किया गया है और उनका व्यापार अवैध है।
यह दुर्लभ और बहुमूल्य पदार्थ, अंतर्राष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत 2.90 करोड़
बता दें व्हेल की उल्टी (एम्बरग्रीस) फ्रेंच शब्द एम्बर और ग्रीस से मिलकर बना है, जिसका मतलब होता है ग्रे एम्बर। इसे व्हेल की उल्टी कहा जाता है। यह कठोर मोम की तरह होता है, जो स्पर्म व्हेल के पाचन तंत्र में मौजूद आंतों में बनती है। एम्बरग्रीस अक्सर समुद्र में तैरते हुए पाया जाता है। कई बार यह समुद्र तटों पर लहरों के साथ बहकर भी आता है। इसके साथ ही ये मरी हुई व्हेल के पेट में भी पाया जाता है। इसे समुद्र का खजाना या फ्लोटिंग गोल्ड भी कहते हैं। यह चीन, जापान, अफ्रीका और अमेरिका के समुद्र तटों और बहामास जैसे ट्रॉपिकल आइलैंड्स पर सबसे ज्यादा मिलता है।
व्हेल की उल्टी जब व्हेल के शरीर से निकलती है, तो इसका रंग आमतौर पर हल्का पीला होता है। ये गाढ़े फैट जैसी होती है। कुछ समय बाद इसका रंग गहरा लाल हो जाता है। कई बार ये काली और सलेटी रंग की होती है। जब एम्बरग्रीस ताजा होता है, तो इससे मल जैसी बदबू आती है, लेकिन जैसे-जैसे वक्त बीतता है इससे मीठी और मिट्टी जैसी सुगंध आने लगती है, जो लंबे समय रहती है।



