Patna: इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में आयोजित होने वाले राजकीय समारोह में देशभक्ति के रंगों के साथ-साथ बिहार की समृद्ध धार्मिक, प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। समारोह के दौरान पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की ओर से कैमूर के ऐतिहासिक और प्रसिद्ध मां मुंडेश्वरी धाम पर आधारित एक भव्य झांकी प्रस्तुत की जाएगी। ‘इको टूरिज्म’ की विशेष थीम पर तैयार की जा रही यह झांकी बिहार के प्राचीन धार्मिक स्थलों के साथ-साथ राज्य की प्राकृतिक सुंदरता से भी लोगों को रूबरू कराएगी।
पंवरा पहाड़ी पर स्थित मुंडेश्वरी मंदिर होगा मुख्य आकर्षण
विभाग ने 15 अगस्त की झांकी निर्माण की तैयारियां तेजी से शुरू कर दी हैं। झांकी के अग्र भाग में कैमूर जिले की पंवरा पहाड़ी पर लगभग 600 फीट की ऊंचाई पर स्थित पौराणिक और ऐतिहासिक मुंडेश्वरी मंदिर का मॉडल प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाएगा। देश के सबसे प्राचीन जीवित मंदिरों में शुमार यह धार्मिक स्थल बिहार के पर्यटन और सांस्कृतिक मानचित्र पर एक बेहद महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
भीमबांध के गर्म जलस्रोत और वाल्मीकि टाइगर रिजर्व की झलक
इस विशेष झांकी की खासियत केवल धार्मिक आस्था तक ही सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसके माध्यम से बिहार के विविध वन्यजीव और वन क्षेत्रों को भी दर्शाया जाएगा। झांकी में मुंगेर स्थित भीमबांध वन्यजीव अभ्यारण्य के घने साल (सखुआ) वनों और प्रसिद्ध गर्म जलस्रोतों को आकर्षक रूप में पेश किया जाएगा। इसके साथ ही पश्चिम चंपारण जिले में स्थित राज्य के इकलौते वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (VTR) के प्राकृतिक वातावरण, जंगलों और वन्यजीवों की मनमोहक छटा को भी प्रदर्शित किया जाएगा।
‘ज्ञान भारतम्’ थीम पर कला एवं संस्कृति विभाग की झांकी
दूसरी ओर, कला एवं संस्कृति विभाग की ओर से समारोह में ‘ज्ञान भारतम्’ विषय पर आधारित झांकी प्रस्तुत की जाएगी। इस झांकी के जरिए भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा से जुड़ी दुर्लभ पांडुलिपियों के वैज्ञानिक सर्वेक्षण, डिजिटाइजेशन और अभिलेखीकरण की आधुनिक तकनीकों को दर्शाया जाएगा। इस प्रस्तुति का मुख्य उद्देश्य भारत की प्राचीन बौद्धिक और साहित्यिक संपदा को संरक्षित करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों से आम जनमानस को परिचित कराना है।
झांकी के माध्यम से पर्यटन और विरासत का प्रचार
प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य गांधी मैदान में उपस्थित लोगों और दूरदर्शन या डिजिटल माध्यमों से समारोह देख रहे दर्शकों को बिहार के प्रमुख इको-टूरिज्म स्थलों की विशेषताओं से अवगत कराना है। पर्यावरण विभाग और कला संस्कृति विभाग की इन झांकियों के जरिए राज्य में धार्मिक व प्राकृतिक पर्यटन की अपार संभावनाओं के प्रति जागरूकता फैलाने का प्रयास किया जा रहा है।





