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Ranchi : कुरकुरे हत्याकांड मामले में गिरफ्तारी के बाद तीन महीनों से जेल में बंद पूर्व पार्षद मो. असलम को आखिरकार झारखंड हाईकोर्ट से जमानत मिल गई। हाईकोर्ट ने दोनों मामलों में 20-20 हजार रुपये के बेल बॉन्ड भरने के निर्देश देते हुए उनकी जमानत याचिका मंजूर की। अदालत ने केस के तथ्यों, परिस्थितियों और उपलब्ध रिकॉर्ड का अध्ययन करने के बाद यह आदेश दिया।
यह मामला 10 जून को हिन्दपीड़ी के ग्वाला टोली निवासी कुरकुरे उर्फ साहिल की हत्या से जुड़ा है। घटना के बाद मृतक के परिजनों ने अपनी शिकायत में पूर्व पार्षद मो. असलम का नाम भी शामिल किया था। वहीं असलम के समर्थकों का दावा है कि घटना के समय वह किसी अन्य मामले में पहले से जेल में बंद थे और उन्हें राजनीतिक व सामाजिक दुश्मनी के चलते साजिशन इस केस में जोड़ा गया। हालांकि, यह मामला अभी न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है और इसकी विवेचना जारी है।
हाईकोर्ट द्वारा जमानत मिलने की जानकारी जैसे ही उनके समर्थकों और परिचितों तक पहुँची, उनके निवास पर लोगों की भीड़ लग गई। स्थानीय लोगों ने घर पहुँचकर पूर्व पार्षद का स्वागत किया और उन्हें जमानत मिलने पर बधाई दी। कई लोगों ने कहा कि असलम लंबे समय से क्षेत्र में सामाजिक और जनसेवा से जुड़े कार्यों में सक्रिय रहे हैं।
वार्ड 22 की कई महिलाओं ने कहा कि असलम के जेल जाने से मोहल्ले में कई विकास और जनसुविधा से जुड़े कार्य रुक गए थे। उनका मानना है कि रिहाई के बाद अब क्षेत्र में रुके हुए कार्यों को फिर से गति मिलने की उम्मीद है। स्थानीय युवाओं ने भी राहत जताई और कहा कि अदालत के फैसले से उन्हें न्याय की उम्मीद और मजबूत हुई है।
रांची के कई हिस्सों में उनके समर्थकों ने जमानत आदेश के बाद एक-दूसरे को मिठाई खिलाई और खुशी जाहिर की। कुछ लोगों ने इसे “न्याय की जीत” बताया, वहीं कई ने उम्मीद जताई कि मामले की आगामी प्रक्रियाओं में भी सच्चाई सामने आएगी।
इस बीच, कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि जमानत मिलना अंतिम निर्णय नहीं होता, बल्कि अदालत में मुकदमे की सुनवाई आगे जारी रहेगी। पुलिस जांच और अदालती बहसों के बाद ही यह तय होगा कि आरोप सिद्ध हैं या नहीं।
फिलहाल, मो. असलम की रिहाई से रांची में उनके समर्थकों के बीच उत्साह का माहौल बना हुआ है और लोग उन्हें फिर से सक्रिय रूप में देखे जाने की उम्मीद जता रहे हैं।

