रांची: झारखंड में हाल ही में हुए बड़े पैमाने पर प्रशासनिक फेरबदल और पुलिस अधिकारियों के तबादलों के बीच कानून-व्यवस्था को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने राज्य की सुरक्षा व्यवस्था और बढ़ती आपराधिक घटनाओं पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है। एसोसिएशन का स्पष्ट कहना है कि केवल अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग कर देने से जमीनी स्तर पर अपराध को नियंत्रित नहीं किया जा सकता। राज्य में अपराधियों के हौसले पस्त करने और कानून-व्यवस्था को स्थायी रूप से मजबूत बनाने के लिए सरकार को संसाधनों, मैनपावर (मानवबल) और बुनियादी ढांचे पर दीर्घकालिक काम करना होगा।

तबादला नियमित प्रक्रिया, लेकिन यह समस्या का समाधान नहीं

झारखंड पुलिस एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष राहुल कुमार मुर्मू ने जमशेदपुर और सरायकेला के कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के हालिया तबादलों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। शुक्रवार को जारी एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में उन्होंने साफ किया कि ट्रांसफर-पोस्टिंग शासन और पुलिस प्रशासन की एक निरंतर चलने वाली नियमित प्रक्रिया है। एसोसिएशन को इस रूटीन प्रक्रिया पर कभी कोई आपत्ति नहीं रही है और न ही वे इसके खिलाफ हैं। लेकिन, जब बात राज्य में बढ़ते अपराध और चरमराती कानून-व्यवस्था जैसी गंभीर चुनौतियों की आती है, तो इसका समाधान केवल नए चेहरों को एक जगह से दूसरी जगह भेजने से नहीं निकाला जा सकता।

सीमित संसाधनों और कम संख्या बल के बीच जूझ रहे पुलिसकर्मी

मुर्मू ने राज्य सरकार का ध्यान पुलिसकर्मियों की वास्तविक समस्याओं की ओर आकर्षित करते हुए कहा कि झारखंड पुलिस लंबे समय से सीमित संसाधनों और भारी संख्या बल की कमी के बीच काम कर रही है। पुलिसकर्मी बेहद कठिन और तनावपूर्ण परिस्थितियों में भी अपनी जिम्मेदारियों का पूरी निष्ठा से निर्वहन कर रहे हैं। ऐसे में सरकार को सिर्फ ऊपरी प्रशासनिक बदलावों तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि पुलिस बल की जमीनी और बुनियादी जरूरतों पर भी गंभीरता से विचार करना चाहिए।

आधुनिक तकनीक और नई नियुक्तियों की सख्त जरूरत

एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष ने जोर देकर कहा कि समय के साथ अपराधियों के तरीके बदले हैं, इसलिए पुलिस को भी आधुनिक होना पड़ेगा। राज्य में कानून-व्यवस्था को बेहतर करने के लिए खाली पड़े पदों पर नई नियुक्तियां कर पुलिसकर्मियों की संख्या बढ़ाना, उन्हें आधुनिक हथियार, तकनीकी संसाधन (जैसे साइबर फॉरेंसिक टूल और आधुनिक वाहन) उपलब्ध कराना बेहद जरूरी हो गया है। जब तक पुलिस बल को ये सुविधाएं नहीं मिलेंगी, तब तक कार्यक्षमता को पूरी तरह से बढ़ाना एक बड़ी चुनौती बना रहेगा।

एसोसिएशन ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि अपराधियों और असामाजिक तत्वों के खिलाफ जीरो-टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इसके लिए एक ऐसी दीर्घकालिक नीति तैयार की जानी चाहिए, जिससे पुलिस व्यवस्था अधिक सक्षम बने और कोई भी अपराधी कानून को अपने हाथ में लेने का साहस न कर सके।

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