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दुर्गापूजा पंडाल में चर्च और ईसा-मरियम की तस्वीर सनातनी आस्था के साथ खिलवाड़ : अमृतेश

Ranchi : राजधानी रांची में आरआर स्पोर्टिंग क्लब द्वारा बनाए गए दुर्गा पूजा पंडाल को चर्च का रूप देने और उसमें ईसा मसीह एवं मरियम की तस्वीर लगाने पर राष्ट्र धर्म रक्षा मंच ने कड़ी आपत्ति जताई है। मंच के अध्यक्ष अमृतेश पाठक ने शुक्रवार

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Ranchi : राजधानी रांची में आरआर स्पोर्टिंग क्लब द्वारा बनाए गए दुर्गा पूजा पंडाल को चर्च का रूप देने और उसमें ईसा मसीह एवं मरियम की तस्वीर लगाने पर राष्ट्र धर्म रक्षा मंच ने कड़ी आपत्ति जताई है। मंच के अध्यक्ष अमृतेश पाठक ने शुक्रवार को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि यह पंडाल सनातनी आस्था और धार्मिक भावना के साथ खिलवाड़ है और इसे धार्मिक भावना को आहत करने वाला क्रूर मजाक माना जाना चाहिए।

अमृतेश पाठक ने सवाल उठाया कि जिस तरह से दुर्गा पूजा पंडाल में चर्च और ईसा-मरियम की तस्वीर लगाई गई है, क्या वही लोग चर्च में भगवान श्रीराम की तस्वीर लगाने की हिम्मत करेंगे। उनका कहना था कि अगर ऐसा किया जाए तो सच्ची धर्मनिरपेक्षता और सद्भाव का असली अर्थ सामने आएगा।

उन्होंने आगे कहा कि मां दुर्गा की पूजा सनातनी समाज की गहरी आस्था और श्रद्धा का प्रतीक है, लेकिन कुछ शरारती और षड्यंत्रकारी तत्वों ने इसे मजाक और अपमान का माध्यम बना दिया। यह कृत्य न केवल हिंदू देवी-देवताओं का अपमान है, बल्कि सनातन धर्म को कमजोर करने की सोची-समझी साजिश का हिस्सा भी माना जा सकता है।

अमृतेश पाठक ने आरोप लगाया कि कुछ लोग हिंदुओं से चंदा लेकर और उनके बीच रहकर ही धर्म का अपमान कर रहे हैं। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण और unacceptable कदम बताया। उनके अनुसार, यह कार्य सनातनी आस्था के खिलाफ एक प्रायोजित प्रयास है जो समाज में धार्मिक भावनाओं को चोट पहुंचाने वाला है।

राष्ट्र धर्म रक्षा मंच के अध्यक्ष ने रांचीवासियों से अपील की कि वे ऐसे पंडालों के इर्द-गिर्द घूमने से परहेज करें और इस तरह के अपमानजनक कदमों का विरोध करें। उनका कहना था कि यह केवल व्यक्तिगत विरोध नहीं, बल्कि सनातनी समाज की सामूहिक आस्था और धार्मिक सम्मान की रक्षा के लिए आवश्यक है।

मंच ने आगे यह स्पष्ट किया कि धार्मिक आयोजनों का उद्देश्य आस्था और भक्ति को बढ़ावा देना होना चाहिए, न कि किसी समुदाय की भावनाओं को आहत करना। अमृतेश पाठक ने प्रशासन और संबंधित आयोजकों से आग्रह किया कि भविष्य में पंडालों के विषय और सजावट पर ध्यान दिया जाए, ताकि किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस न पहुंचे।

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