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सीएजी रिपोर्ट में खुलासा : झारखंड में 368 बालू घाट बंद, 70.92 करोड़ का राजस्व नुकसान

Ranchi : झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान गुरुवार को वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर द्वारा रखी गई सीएजी रिपोर्ट में झारखंड राज्य खनिज विकास निगम (जेएसएमडीसी) की कार्य प्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2017 से 2022 के

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Ranchi : झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान गुरुवार को वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर द्वारा रखी गई सीएजी रिपोर्ट में झारखंड राज्य खनिज विकास निगम (जेएसएमडीसी) की कार्य प्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2017 से 2022 के बीच निगम बालू घाटों के संचालन में निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करने में विफल रहा, जिसके कारण राज्य सरकार को भारी राजस्व हानि उठानी पड़ी।

सीएजी के अनुसार झारखंड में कुल 608 बालू घाट चिन्हित हैं। इनमें से जेएसएमडीसी ने केवल 389 घाटों को चालू करने का प्रयास किया, लेकिन वास्तविक रूप से सिर्फ 21 बालू घाट ही संचालित किए जा सके। इस प्रकार 368 घाट पाँच वर्षों तक गैर परिचालित रहे। इन घाटों का कुल क्षेत्रफल 9,782.55 एकड़ है।

रिपोर्ट के अनुसार नवंबर 2019 से मार्च 2022 के बीच इन गैर परिचालित बालू घाटों के कारण राज्य सरकार को लगभग 70.92 करोड़ रुपये के राजस्व की सीधी हानि हुई। नियमों के अनुसार चालू बालू घाटों के लिए प्रति एकड़ 30,000 रुपये लगान या हटाए गए बालू की मात्रा के हिसाब से स्वामित्व शुल्क का भुगतान अनिवार्य था। लेकिन घाटों के संचालन में विफलता के कारण यह राजस्व नहीं मिल सका।

बालू की बिक्री से हुई आय का एक तिहाई हिस्सा IT सॉल्यूशन पर खर्च

सीएजी रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि जेएसएमडीसी ने वर्ष 2018-22 के दौरान केवल 22 बालू घाटों से होने वाली बिक्री की आय का एक तिहाई से अधिक हिस्सा आईटी सॉल्यूशन पर खर्च कर दिया। रिपोर्ट कहती है कि इस अवधि में निगम ने सिर्फ 22 घाटों के लिए खनन योजना तैयार की और पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त की, जबकि अधिकतम 16 घाट ही संचालित थे।

इसके विपरीत, जेएसएमडीसी ने 200 घाटों के संचालन के लिए महंगे आईटी सॉल्यूशन खरीदे और कई प्रकार की डिजिटल व्यवस्थाओं पर भारी खर्च किया। सीएजी के मुताबिक निगम यदि चाहे तो आईटी सॉल्यूशन को छोटी अवधि के लिए लागू कर सकता था या उपयोगकर्ता स्वीकृति परीक्षण को सीमित दायरे में कर सकता था। लेकिन ऐसा नहीं किया गया, जिससे बेवजह भारी खर्च बढ़ गया और राजस्व में कमी आई।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि मुख्यालय स्तर पर कम संख्या में आईटी कर्मियों की नियुक्ति करके भी खर्च को कम किया जा सकता था, परंतु इस दिशा में कोई पहल नहीं की गई। इससे निगम के वित्तीय प्रबंधन पर सवाल उठे हैं। सीएजी की यह रिपोर्ट झारखंड सरकार की खनन व्यवस्था, विशेषकर बालू घाटों के संचालन से जुड़े प्रबंधन की खामियों को सामने लाती है और राजस्व हानि का साफ संकेत देती है।

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