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बायोमेट्रिक अटेंडेंस जरूरी, तभी जारी होगी आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की सैलरी

देवघर जिले के सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में आउटसोर्सिंग सेवाओं के लिए सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में 15 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। इस राशि का इस्तेमाल अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों, जांच लैब, कार्यालयों और डायग्नोस्टिक सेंटरों में आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के भुगतान के लिए

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देवघर : देवघर जिले के सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में आउटसोर्सिंग सेवाओं के लिए सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में 15 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। इस राशि का इस्तेमाल अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों, जांच लैब, कार्यालयों और डायग्नोस्टिक सेंटरों में आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के भुगतान के लिए किया जाएगा। मेडिकल कॉलेजों को इस योजना से बाहर रखा गया है।

सरकार ने साफ किया है कि आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को भुगतान तभी किया जाएगा, जब उनकी उपस्थिति बायोमेट्रिक सिस्टम से दर्ज और सत्यापित होगी। संबंधित संस्थान के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी कर्मचारियों की हाजिरी और काम का सत्यापन करेंगे। इसके बाद प्रमाण पत्र के आधार पर ही भुगतान के लिए बिल पास होगा।

सरकार ने जरूरत से ज्यादा आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की नियुक्ति पर भी रोक लगाई है। अस्पताल में मरीजों की संख्या, खाली पद और पहले से काम कर रहे नियमित व संविदा कर्मचारियों की संख्या को ध्यान में रखकर ही अतिरिक्त कर्मचारियों की जरूरत तय की जाएगी।

नियमों की अनदेखी कर अनावश्यक कर्मचारियों को रखने पर संबंधित प्रभारी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

वहीं, 15 करोड़ रुपये के खर्च का हिसाब भी हर महीने देना होगा। संबंधित अधिकारियों को हर महीने की 10 तारीख तक खर्च का विवरण स्वास्थ्य विभाग को भेजना होगा। खर्च की जांच हर तीन महीने में महालेखाकार, झारखंड के स्तर पर कराई जाएगी।

देवघर के सिविल सर्जन-सह-मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी शिव प्रसाद मिश्रा को राशि की निकासी और खर्च की जिम्मेदारी दी गई है। राशि देवघर कोषागार से निकाली जाएगी।

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