चैनपुर (गुमला): चैनपुर प्रखंड की बिंदोरा पंचायत स्थित बिंदोरा हरिजन टोली आज भी विकास की मुख्यधारा से कोसों दूर है। करीब 24 से 25 परिवारों की यह बस्ती सड़क, शुद्ध पेयजल, पक्का आवास, शिक्षा और रोजगार जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए वर्षों से संघर्ष कर रही है। सरकारी योजनाओं के दावे भले ही बड़े हों, लेकिन यहां की जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां करती है।
जर्जर आवासों में गुजर रही जिंदगी
बस्ती में बने अधिकांश सरकारी आवास अब रहने लायक नहीं बचे हैं। दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ चुकी हैं और टीन की छतें जगह-जगह से टूट चुकी हैं। बारिश के दिनों में घरों के भीतर पानी टपकता है, जबकि तेज हवा चलने पर छत उड़ जाने का डर हमेशा बना रहता है। ग्रामीण बताते हैं कि हर मौसम उनके लिए नई मुसीबत लेकर आता है, लेकिन अब तक किसी जिम्मेदार अधिकारी ने उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया।
एक ही घर में रह रहे दो-दो परिवार
आवास की कमी के कारण कई परिवार एक ही छोटे मकान में रहने को मजबूर हैं। परिवार बढ़ने के बावजूद नए आवास नहीं मिले। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को सीमित जगह में जीवन बिताना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए आवेदन दिया, लेकिन आज तक लाभ नहीं मिला।
एक किलोमीटर दूर से लाना पड़ता है पानी
हर सुबह बस्ती की महिलाएं और बच्चे बर्तन लेकर लगभग एक किलोमीटर दूर स्थित डोढ़ा (छोटे नाले) से पानी लाने निकलते हैं। इसी पानी से पीने, खाना बनाने और अन्य घरेलू कार्य पूरे किए जाते हैं। यही पानी पशु भी पीते हैं, जिससे संक्रमण और बीमारियों का खतरा बना रहता है। गर्मी के मौसम में यह परेशानी और बढ़ जाती है।
शोपीस बना जलमीनार
ग्रामीणों के अनुसार, वर्षों पहले पेयजल संकट दूर करने के उद्देश्य से बस्ती में एक जलमीनार बनाया गया था, लेकिन वह लंबे समय से खराब पड़ा है। कई बार पंचायत और संबंधित विभाग को इसकी सूचना दी गई, लेकिन आज तक मरम्मत नहीं कराई गई। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जलमीनार चालू हो जाए तो पूरी बस्ती की पानी की समस्या काफी हद तक खत्म हो सकती है।
शिक्षा से भी दूर हो रहे बच्चे
बस्ती के आसपास न तो कोई प्राथमिक विद्यालय है और न ही आंगनबाड़ी केंद्र। छोटे-छोटे बच्चों को पढ़ाई के लिए काफी दूरी तय करनी पड़ती है। दूरी और सुविधाओं के अभाव के कारण कई बच्चे नियमित रूप से स्कूल नहीं जा पाते, जिससे उनका भविष्य प्रभावित हो रहा है।
दिहाड़ी मजदूरी ही आजीविका का सहारा
हरिजन टोली के अधिकांश परिवार दिहाड़ी मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। नियमित रोजगार नहीं मिलने के कारण आर्थिक स्थिति कमजोर बनी हुई है। सीमित आय के कारण लोग अपने जर्जर मकानों की मरम्मत तक नहीं करा पा रहे हैं। कई परिवारों के लिए दो वक्त की रोटी जुटाना भी चुनौती बन चुका है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से लगाई गुहार
ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से नए आवास उपलब्ध कराने, जर्जर मकानों की मरम्मत, खराब जलमीनार को चालू कराने, शुद्ध पेयजल की व्यवस्था, स्कूल एवं आंगनबाड़ी केंद्र खोलने तथा अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि विकास की योजनाओं का लाभ वास्तव में अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है, तो बिंदोरा हरिजन टोली जैसे गांवों की समस्याओं का शीघ्र समाधान करना होगा। उनका कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में किसी बड़े हादसे या गंभीर समस्या से इनकार नहीं किया जा सकता।




