Patna: बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की कार्रवाई लगातार जारी है। इसी कड़ी में समस्तीपुर जिले के दलसिंहसराय थाना क्षेत्र में एक पंचायत मुखिया को 1.20 लाख रुपए रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया गया। कार्रवाई के बाद इलाके में हड़कंप मच गया और स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं।
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के अनुसार, दलसिंहसराय थाना क्षेत्र के चकबहाउद्दीन गांव निवासी अब्दुल मन्नान ने शिकायत दर्ज कराई थी कि राज चकबहाउद्दीन ग्राम पंचायत के मुखिया सियाराम राय उनसे निलंबन से मुक्ति दिलाने के नाम पर रिश्वत की मांग कर रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक, अब्दुल मन्नान पहले सुजौली स्थित प्राथमिक विद्यालय मोहना वार्ड में पंचायत शिक्षक के पद पर कार्यरत थे। कुछ वर्ष पहले एक मामले में उन्हें निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद उन्होंने दोबारा शिक्षक पद पर योगदान देने की प्रक्रिया शुरू की थी। इसी दौरान कथित तौर पर उनसे रिश्वत मांगी गई।
शिकायत मिलने के बाद निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने मामले का सत्यापन कराया। जांच के दौरान रिश्वत मांगने के आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए। इसके बाद पुलिस उपाधीक्षक अमरेन्द्र प्रसाद विद्यार्थी के नेतृत्व में एक विशेष धावादल का गठन किया गया।
पूर्व निर्धारित योजना के तहत बुधवार को टीम ने कार्रवाई करते हुए आरोपी मुखिया को गुदरीपुल के पास स्थित अब्दुल मन्नान की श्रृंगार दुकान से 1.20 लाख रुपए रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार कर लिया। अधिकारियों ने बताया कि आरोपी से पूछताछ की जा रही है और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसे निगरानी की विशेष अदालत में पेश किया जाएगा।
इस बीच, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने गया जिले में भी भ्रष्टाचार के एक अन्य मामले का खुलासा किया है। बेलागंज थाना क्षेत्र की पनारी ग्राम पंचायत के चौकीदार मनीष कुमार को नौ हजार रुपए रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया। आरोप है कि उसने एक मामले से नाम हटाने के बदले पैसे की मांग की थी।
बिहार में लगातार हो रही इन कार्रवाइयों को भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी विभाग की सख्त मुहिम के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि रिश्वतखोरी के मामलों में दोषियों के खिलाफ आगे भी कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।



