Patna: बिहार में माध्यमिक व उच्च माध्यमिक बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए मॉडल स्कूल विकसित किये गये हैं, जहां छात्र-छात्राओं को निःशुल्क जेईई-नीट की तैयारी के साथ-साथ कंटेंट क्रिएशन, स्पोर्ट्स व सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों के लिए हाईटेक सुविधाएं दी जा रही हैं। इसी तर्ज पर अब प्राइमरी स्कूलों में पढ़ने वाले छोटे-छोटे बच्चों के लिए भी विश्वस्तरीय व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।
प्राइमरी छात्रों के लिए मॉडल स्कूलों की तर्ज पर विकसित हो रहे आंगनबाड़ी केंद्र
राज्य के अलग-अलग प्रखंडों में आंगनबाड़ी केंद्रों को चिह्नित करके उन्हें ‘सक्षम आंगनबाड़ी केंद्र’ में तब्दील करने का कार्य तेजी से किया जा रहा है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों और कस्बों में पढ़ने वाले प्राथमिक बच्चों को भी उच्च कोटि की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।
सक्षम आंगनबाड़ी केंद्रों की आधुनिक विशेषताएं और सुविधाएं
इन केंद्रों पर बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए अत्याधुनिक इंतजाम किए गए हैं, जो निम्नलिखित हैं:
बाला पेंटिंग (Bala Painting): बच्चों को खेल-खेल में सिखाने के लिए दीवारों पर हिंदी वर्णमाला, स्वर-व्यंजन, अंकों और गणितीय आकृतियों के साथ-साथ कविताएं, नैतिक शिक्षा की कहानियां और फल-सब्जियों व पशु-पक्षियों के चित्र बनाकर उनके नाम हिंदी में लिखे जा रहे हैं।
डिजिटल और स्मार्ट सुविधाएं: किंडरगार्टन के बच्चों के सीखने के लिए केंद्रों में एलईडी टीवी, वाई-फाई और नॉन-इलेक्ट्रिक (एनई) फिल्टर स्थापित किए जा रहे हैं।
जल संरक्षण: जल संचयन को बढ़ावा देने के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों परिसर में ही रेन वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था भी की जा रही है।
जिलों में प्रगति और बच्चों के लिए सुनहरा भविष्य
अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, छोटे बच्चों के उज्ज्वल भविष्य और मजबूत आधारशिला के लिए अब तक प्रदेशभर में 11,529 सक्षम आंगनबाड़ी केंद्र तैयार किए जा चुके हैं। उदाहरण के तौर पर, सहरसा जिले में 26 में से 21 केंद्रों को इस नए स्वरूप में बदला जा चुका है।
सरकार का यह प्रयास है कि ग्रामीण परिवेश के विद्यार्थियों को बचपन से ही उन्नत ज्ञान और प्रतिस्पर्धात्मक माहौल मिले, ताकि वे भविष्य की हर चुनौती का सामना करने के लिए अभी से तैयार हो सकें।




